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मौसम ने किसानों के मुंह से छीना निवाला

Tue, 10 May 2016 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद
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चौकी महमदपुर में खीरे की फसल को देख माथे पर हाथ रखे बैठा किसान। - फोटो : अमर उजाला
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मौसम के बदलते मिजाज ने अन्नदाताओं का निवाला छीन लिया है। हल्की बारिश और आसमान में छाए बादलों के कारण तरबूज, खरबूजा, खीरा तथा ककड़ी में परपरा रोग लग गया है। सबसे ज्यादा घाटा उन किसानों को हुआ है जो बीज उत्पादन कर बड़ी कंपनियों को बेचते हैं।
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विकासखंड कमालगंज के गांव चौकी महमदपुर को बीज उत्पादक किसानों के नाम से जाना जाता है। बीज उत्पादन के लिए यहां के किसान रमेश कश्यप, विमल कश्यप, महेश नारायन, हंसराम, सर्वेश राजपूत, ब्रजमोहन, सतेंद्र कुमार, रामदीन वर्मा सहित आधा सैकड़ा किसानों ने बीज तैयार करने के लिए 25 हेक्टेअर भूमि पर खरबूजा, 15 हेक्टेअर भूमि पर तरबूज और 60 हेक्टेअर भूमि पर खीरा की फसल तैयार की थी।

इसी तरह गंगा की कटरी में भी इन फसलों को किसानाें ने भारी लागत लगाकर तैयार की थी। मौसम के बदलते मिजाज से इन फसलों को तैयार करने वाला किसान करोड़ों के कर्ज में दब गया है। अधिकांश किसान अपनी फसलों को देख  माथा पकड़कर बैठ गए हैं।
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गांव चौकी महमदपुर के रहने वाले अरुण कश्यप का कहना है कि वे एक अरसे से बीज उत्पादन करते चले आ रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यहां के किसानों को इसलिए है कि मौसम का मिजाज बादल छाए रहने से ठंडा पड़ गया और हल्की सी बरसात भी हो गई। इस वजह से इन फसलों में परपरा रोग लग गया।

किसान रामदीन वर्मा का कहना है कि परपरा रोग लगने से उत्पादन न के बराबर हो जाता है और फूल खेतों में झड़ने लगते हैं। फल आने के बाद वे खेतों में ही सूख जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कच्ची स्थिति में ही फल  पकने से उसमें बीज का उत्पादन न के बराबर हो जाता है।
 
ग्राम प्रधान शिवम राठौर का कहना है कि खरबूजा और तरबूज जितनी ही धूप पड़ती है उतने ही मीठे होते हैं। पानी बरसने और ठंड रहने से मीठापन खत्म हो जाता है। इन दोनों फसलोें के लिए धूप की आवश्यकता होती है। बेमौसम बरसात से किसानों को भारी घाटा हुआ है।
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