फर्रुखाबाद। नरौरा बांध से लगातार गंगा में पानी छोड़े जाने से हालात फिर बिगड़ने लगे हैं। राजेपुर-बदायूं मार्ग स्थित चित्रकूट डिप पर दोबारा एक फुट से अधिक पानी भर गया है।
हालात यह है कि जिन गांवों से बाढ़ का पानी उतर चुका था, वहां फिर से पानी बढ़ने लगा है। महज दो दिनों में गंगा का जलस्तर 35 सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.95 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 137.10 मीटर से केवल 15 सेंटीमीटर नीचे है।
शुक्रवार को नरौरा बांध से 1,61,454 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। 17 से 19 सितंबर के बीच कुल 8,55,606 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। उत्तराखंड में बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण बांधों से गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। रामगंगा का जलस्तर 135.60 मीटर से घटकर 135.50 मीटर पर पहुंच गया।
खो, हरेली, रामनगर बैराज से भी 18,536 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। राजेपुर-बदायूं मार्ग स्थित चित्रकूट डिप पर फिर से एक फुट से अधिक पानी भर गया है। जिन गांवों से बाढ़ का पानी उतर चुका था, वहां फिर से पानी बढ़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह बार-बार बाढ़ आने से पूरे वर्ष की व्यवस्था ठप हो जाएगी।
नवरात्र पर कैसे करेंगे माता का पूजन
ग्रामीणों ने बताया कि डेढ़ माह से बाढ़ का प्रकोप झेल रहे हैं। बरसात और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण घरों के अंदर तक पानी भरा है। गंगा में पानी कम होने से ऐसा लगा था, कि अब मकानों में सफाई कर सुरक्षित रह सकेगें। लेकिन दोबारा से जलस्तर बढ़ने से अब काफी कठिनाई बढ़ने लगी है। 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू होने को हैं। बाढ़ के चलते कैसे माता रानी का पूजन करेंगे।
सड़क किनारे डेरा डालने को मजबूर लोग
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद दोबारा बढ़ने से बाढ़ प्रभावित परिवारों की परेशानियां बढ़ गई हैं। जो लोग घर लौटकर सामान्य जीवन शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, वे फिर से सड़कों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
बाढ़ से कटी सड़क पर शुरू कराया मरम्मत कार्य
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ से गांव भुड़िया भेड़ा को जाने वाली सड़क कट गई थी। इससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया था। इस मार्ग से जुड़े लगभग 10 गांवों के करीब 30 हजार लोगों को निकलने में काफी परेशानी हो रही है।
मरीजों को अस्पताल ले जाना, बच्चों को स्कूल पहुंचाना और जरूरत का सामान लाना मुश्किल हो गया था। समाजसेवी समरदीप सिंह ने पहल करते हुए सड़क की अस्थायी मरम्मत का जिम्मा संभाला।
उन्होंने गड्ढों और टूटे हिस्सों में मिट्टी व ईंट डलवाकर रास्ता बनाने का काम शुरू कराया, जिससे लोगों को आने-जाने में राहत मिलने लगी है। (संवाद)
फोटो-22, प्राथमिक विद्यालय कुबेरपुर में भरा पानी। संवाद
फोटो-22, प्राथमिक विद्यालय कुबेरपुर में भरा पानी। संवाद
फोटो-22, प्राथमिक विद्यालय कुबेरपुर में भरा पानी। संवाद