तहखाने में बंद बच्चे गोली व बम चलने से सहम गए। बंधक बच्चों में शामिल किशोर विनीत ने उन्हें संभाला। उसने बच्चों को समझाया कि डरें नहीं और तहखाने की अंदर से कुंडी बंद कर ली। पर शातिर सुुुभाष की पत्नी रूबी ने कुंडी खोल दी। इसके बाद सुभाष ने बच्चों को तमंचा दिखाकर धमकाया। इससे बच्चे शांत हो गए।
मोहम्मदाबाद के गांव करथिया में जिन 23 बच्चों को शातिर ने बंधक बनाया था उनमें गांव के रामकिशोर कठेरिया का 14 वर्षीय बेटा कक्षा नौ का छात्र विनीत भी शामिल था। वह बंधक बच्चों में बड़ा था और उसने अपनी समझदारी व निडरता का परिचय भी दिया। उसने बताया कि जब सुभाष ने बंद किया तो उसने विरोध किया।
इसके बाद जब उसने पुलिस पर फायरिंग की और हथगोला फेंका तो उसके साथ बंद किए गए सभी बच्चे सहम गए और रोने लगे। इस पर उसने बच्चों को हौसला दिया कि डरो नहीं सभी लोग बाहर निकलेंगे। ये कहने के बाद उसने तहखाने की कुंडी अंदर से बंद कर ली। वहां बम चलाने के लिए लगाए तार को विनीत ने तोड़ डाला।
पर अंदर सुभाष की पत्नी रूबी थी। उसने कुंडी खोल दी। सुभाष अंदर पहुंच गया और तमंचा दिखाकर बच्चों को धमकाया। विनीत ने इसका विरोध किया तो सुभाष ने उसे थप्पड़ जड़ दिया। पिर भी विनीत ने कहा कि उन्हें वह क्यों बंधक बनाए है। आशाराम की जुड़वां बेटियां गंगा (12) व जमुना (12) भी बच्चों को जल्द छूटने का ढांढस बंधाती रहीं।
बम की धमकी के बावजूद बहादुर अंजली ने नहीं खोली कुंडी
बेटियां अपनी पर आ जाएं तो वह किसी से नहीं डरती हैं। ऐसा ही कक्षा नौ में पढ़ने वाली अंजली ने भी किया। सुभाष और उसकी पत्नी जब बाहर थी तभी अंजली ने तहखाने की कुंडी अंदर से बंद कर ली। सुभाष तहखाने में रखे कारतूस व बम लेने गया तो अंजली ने कुंडी नहीं खोली। सुभाष ने धमकाया कि वह सभी को बम से उड़ा देगा, तो अन्य बच्चे डर गए पर अंजली ने कहा कि वह अब कुंडी नहीं खोलेगी। मारना है तो मार डालो, देखें कैसे मारोगे।
अंजली ने बताया कि रात को जब करीब 10.30 बजे आदेश की छह माह की बंधक बेेटी शबनम रोने लगी तो वह उसे अपनी गोद में लेकर चुप कराने लगी। तभी रूबी ने पति सुभाष से शबनम को उसकी मां को देने को कहा। सुभाष तैयार हो गया। अंजली ने शबनम को रूबी को दे दिया। रूबी उसे लेकर सुभाष को देने बाहर गई।
तभी अंजली ने अंदर से कुंडी बंद कर ली। सुभाष जब शबनम को उसकी मां को देकर लौटा तो तो अंजली ने कुंडी खोलने से इनकार कर दिया। इस पर सुभाष ने धमकी दी कि वह सभी को बम से उड़ा देगा। यह सुन अंजली व विनीत को छोड़कर अन्य बच्चे डर गए और वह कुंडी खोलने को कहने लगे।
अंजली ने कहा कि वह कुंडी नहीं खोलेगी। तो मारना है तो मार डालो, देखें कैसे मारोगे। अंजली व विनीत ने अन्य बच्चों को ढांढस बंधाया कि पुलिस उनको बाहर निकालेगी। बाद में हुआ भी ऐसा ही। जब पुलिस कार्रवाई में सुभाष मारा गया और पुलिस अंदर पहुंच गई तभी अंजली ने कुंडी खोली।
बच्चों को दिए बिस्कुट व टॉफी
तहखाने में बंद बच्चे जब रोने लगे और कहा कि उन्हें भूख लगी है, तब सुभाष ने सभी को बिस्कुट व टॉफी खाने को दे दीं। बच्चों ने शाम को जब बिस्कुट खा लिए तो सुभाष के पास केवल टॉफी बची थीं। रात को बच्चों ने फिर कहा कि उन्हें भूख लगी है अब उन्हें छोड़ दे। इस पर रात करीब आठ बजे बाहर से बिस्कुट मंगवाकर बच्चों को खाने को दे दिए थे। इस दौरान बीच-बीच में सुभाष खुद शराब पीता रहा।