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Farrukhabad News: झोपड़ी में रह रहे ग्रामीण, गांव गरीबी मुक्त घोषित

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फर्रुखाबाद। बढ़पुर विकास खंड के गांव गुतासी को शासन ने गरीबी मुक्त घोषित कर दिया है। पर यहां अभी भी गरीब झोपड़ी में परिवार के साथ रहते दिख रहे हैं। इस गांव में 51 अंत्योदय कार्डधारक व करीब 100 मनरेगा मजदूर हैं। इससे सरकारी आंकड़े ही गांव गरीबी मुक्त न हाेने पर मुहर लगा रहे हैं।
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गरीबी मुक्त घोषित की गई बढ़पुर ब्लॉक क्षेत्र की मॉडल ग्राम पंचायत गुतासी की हकीकत देखने पहुंचे तो गांव में घुसते ही अन्नपूर्णा भवन के पास ही एक झोपड़ी पड़ी नजर आई। आवाज लगाई तो झोपड़ी से एक महिला निकली पूछने पर उसने अपना नाम सीमा बताया। जानकारी की तो पता चला कि उसे अभी तक किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। बोली यदि कालोनी(आवाज) मिल जाती तो इस ठंड में झोपड़ी में क्यों रहते। राशन कार्ड है, आयुष्मान कार्ड बना है, मनरेगा जॉब कार्ड है। अब आवास मिल जाए तो ठीक रहे। मजदूरी कर परिवार पेट पालते है। बीच गांव से गुजरे जसमई-पुठरी मार्ग से हम आगे बढ़े तो पानी की टंकी से कुछ दूरी पर एक झोपड़ी और दिखी। इस झोपड़ी में कुछ बच्चे बैठे थे। जानकारी करने पर पता चला इस झोपड़ी में लक्ष्मण का परिवार रहता है। उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। इसके बाद गांव की स्थिति देखने के लिए कुछ और आगे बढ़ तो मिनी सचिवालय दिखा। भवन की रंगाई पुताई बेहतर होने के साथ वहां की वहां की व्यवस्था भी दुरुस्त दिखी। पंचायत सहायक की ड्यूटी एसआईआर में लगे होने की जानकारी दी गई। यहां से कुछ दूरी पर जूनियर स्कूल का भवन भी चकाचक नजर आया। सामने बनी झोपड़ी में पहुंचने पर पता चला कि यह सुशमा पत्नी कप्तान की है। कप्तान मजदूरी करने गए थे। झोपड़ी के पास ही बच्चे खेल रहे थे। इसके बाद गांव के प्रधान आशीष मिश्रा से बात की तो उन्होंने बताया कि गांव गरीबी मुक्त हो गया है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। जिन लोगों को आवास योजना का लाभ नहीं मिला है उनके आवेदन कराए हैं। जल्द आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा।
इसी वित्तीय वर्ष में जीरो पावर्टी में भी 10 परिवार चयनित किए गए। खास बात तो यह है कि पूर्ति विभाग से 51 परिवारों को जारी अंत्योदय कार्ड गरीबी का प्रमाण दे रहे हैं। इसके अलावा इस गांव में करीब 100 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं। गांव में 37 महिलाओं को विधवा पेंशन मिल रही है और 54 को वृद्धावस्था पेंशन व 22 निशक्तों को दिव्यांग पेंशन मिल रही है। गांव में 349 आयुष्मान कार्ड बने हैं। इससे जाहिर है कि वह अपने परिवार का इलाज के लिए सक्षम न होने से सरकारी सहायता की जरूरत है।
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जिले के आला अधिकारियों को भी नहीं पता है कि गुतासी का गरीबी मुक्त गांव में चयन कैसे हुआ है। उनका कहना है कि जीरो पावर्टी योजना के पोर्टल पर गांव के लोगों को सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा होगा तो उसे गरीबी मुक्त घोषित कर दिया गया होगा।

गांव के प्रधान आशीष मिश्रा का कहना है कि गांव में बने 51 अन्त्योदय कार्डों में अधिकांश परिवार अपात्र हैं। पूर्ति विभाग के खेल में संपन्न परिवार गरीबों का अनाज खा रहे हैं। शिकायत करने पर भी पूर्ति विभाग में सुनवाई नहीं हुई। इससे अपात्रों के अंत्योदय राशन कार्ड चल रहे हैं। गांव को मॉडल बनाने के लिए उन्होंने भरसक प्रयास किए, लेकिन अधिकारियों का सहयोग न मिलने से उनका सपना पूरा नहीं हो सका। इससे गत माह उन्होंने सशर्त इस्तीफा दे दिया। अधिकारियों ने इस्तीफा तो स्वीकार नहीं किया, बल्कि मौखिक रूप से उनके अधिकारों पर रोक लगा दी। इससे जो विकास कार्य होने थे, उन पर भी ब्रेक लग गया। प्रधान ने यह भी बताया कि गरीबी मुक्त गांव में न तो एक भी अंत्योदय कार्ड होना चाहिए और न ही मनरेगा जॉब कार्ड। गांव के सभी मकान पक्के और परिवारों के आय का स्रोत भी होना चाहिए।
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