सीतापुर में पकड़े गए डॉ. अनुपम दुबे का जनपद में खासा दबदबा है। उनकी राजनीति में भी अच्छी पकड़ है। 2017 में उन्होंने सवायजपुर से बसपा से विधानसभा चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे। इससे पहले 2012 में उन्होंने फर्रुखाबाद सदर सीट से निर्दलीय चुनाव में किस्मत अजमाई थी। उनके छोटे भाई मोहम्मदाबाद के ब्लाक प्रमुख हैं। उनके खिलाफ दर्ज अधिकांश आपराधिक मुकदमों में एफआर लग चुकी है।
फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी डॉ. अनुपम दुबे एडवोकेट मूल रूप से मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव सहसपुर के निवासी हैं। उनका गांव में इंटर कालेज, लॉ कालेज और ईंट भट्ठा संचालित है। हत्या की घटनाओं में इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। पर अधिकांश मुकदमों में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लग चुकी है। इससे जनपद में इनका खासा दबदबा है।
इनके कई अन्य व्यवसाय भी हैं। राजनीति में पकड़ बनाने के लिए सबसे पहले डॉ. अनुपम दुबे ने वर्ष 2000 में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। पर यह चुनाव हार गए थे। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2012 में सदर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी ताकत का राजनीति में एहसास कराया था। पर इस चुनाव में भी इन्हें हार का सामना करना पड़ा था। डॉ. अनुपम दुबे ने वर्ष 2017 में पड़ोसी जनपद हरदोई की सवायजपुर विधानसभा सीट से बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था।
यह चुनाव हारकर वह दूसरे स्थान पर रहे थे। गांव में इनकी मां निर्विरोध प्रधान चुनी जाती रही हैं। वह इन दिनों भी ग्राम प्रधान हैं। इनके भाई ठेकेदारी का भी काम करते हैं। छोटा भाई अमित दुबे उर्फ बब्बन मोहम्मदाबाद के ब्लाक प्रमुख है। इनके पिता स्व. महेश चंद्र दुबे वकील थे। उनकी जनपद के बड़े वकीलों में गिनती होती थी।