फर्रुखाबाद। टीए के अलावा निलंबन अवधि का भुगतान न होने से परेशान हेड कांस्टेबल ने वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र की शिकायत डीजीपी से की थी। डीजीपी के आदेश पर ही विजिलेंस ने मामले की जांच की।
इसमें शिकायत की पुष्टि होने पर ही विजिलेंस ने वरिष्ठ लेखाकार को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार करने की कार्रवाई की। इस बात का उल्लेख विजिलेंस टीम के सदस्यों ने पुलिस ऑफिस में यूपी 112 के सिपाही के हंगामा करने के दौरान भी किया था।
हेड कांस्टेबल आदित्य कुमार वर्मा वर्ष 2014 से 2019 तक कुशीनगर में तैनात रहा था। इस दौरान वह दो बार निलंबित किया गया। बहाल होने के बाद बाद उसका स्थानांतरण फर्रुखाबाद हुआ था। जबकि निलंबन अवधि का भुगतान अभी तक नहीं हो सका।
वह इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत भी कर चुका था। पिछले दिनों इस मामले की उसने सैनिक सम्मेलन में भी जानकारी दी थी। इसके बाद उसके भुगतान के लिए अधिकारियों ने पत्राचार भी किया।
इस बीच करीब चार माह पूर्व हेड कांस्टेबल के पिता कपिल देव वर्मा का कैंसर के चलते निधन हो गया था। इसके बाद से आदित्य परेशान चल रहा था। उसने फिर अपने बकाया भुगतान का प्रयास किया, लेकिन उससे हर बार रिश्वत की मांग की गई। इससे परेशान होकर उसने 8 नवंबर को पूरे मामले की शिकायत डीजीपी से की, साथ ही गोपनीय जांच कराने की मांग की।
डीजीपी के आदेश पर ही विजिलेंस ने मामले की जांच की इसमें भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बाद विजिलेंस ने वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया।