फर्रुखाबाद। दरगाह हुसैनिया मुजीबिया का 146वां सालाना उर्स धूमधाम से मनाया गया। कव्वालों और शायरों ने नातिया कलाम पेश कर वाहवाही लूटी। सज्जादानशीन ने मुल्क और कौम की दुआ की।
मौलाना शमशाद अहमद चतुर्वेदी ने वलियों की अजमत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दरगाहें आपसी मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देती हैं। आस्ताने पर सभी धर्मों के लोग शिरकत करते हैं। यहां आने वाले अकीदतमंदों की झोली भर जाती है।
सज्जादानशीन कारी शाह फसीह मुजीबी ने कहा कि वलियों के दरबार में सब एक समान हैं। कोई छोटा और बड़ा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि आस्ताने से जुड़ने वाले तरक्की की राह पर अग्रसर होते हैं। कुल फातहा के दौरान सीतापुर से आए कव्वाल सबीर नाजिर और मुन्ना मेहरबान ने पाकीजा कलाम पेश कर अकीदतमंदों की दाद हासिल की। उम्दा शेरों पर अकीदतमंदों ने दिल खोलकर नजराने लुटाए।
उर्स में हाफिज साकिर अली, मोहम्मद हारुन और जान मोहम्मद ने कुरान की तिलावत की। उर्स का समापन हजरत हुसैन बक्श साकिर रहमानी की कुल फातहा के साथ हुआ। उर्स में इंतजार अली, सूफी जबीर अहमद खां, लड्डन मियां, शरीफ खां, बिलाल शफीकी, रफी, रहमत अली, आफताब अली, अजहर अली, फरहान अली आदि मौजूद रहे।