तकरीबन 25 साल पहले भूमिगत हुए पांच पाकिस्तानियों के साथ पांच महिलाएं भी पाकिस्तान से यहां आई थीं। इन महिलाओं ने कायमगंज और कमालगंज में अपनी शादी रचा ली और भारत की नागरिकता के लिए प्रयास शुरू कर दिए। पाकिस्तान से आईं पांच महिलाओं में से एक महिला की आठ माह पहले मौत हो गई।
चार को शासन ने 11 साल बाद भारत की नागरिकता दे दी। फिलहाल शादाब प्रकरण सामने आने के बाद एक बार फिर पाकिस्तानियों की पत्रावलियां खंगाली जा रही हैं।
पाकिस्तान से पांच महिलाएं सोफिया, फातिमा, हुमैरा, आफिया और हसीना बेगम वर्ष 1995 में वैधानिक वीजा और पासपोर्ट पर कायमगंज पहुंचीं। इन महिलाओं में से आफिया ने कायमगंज के मोहल्ला कलाखेल निवासी अतर अली के साथ शादी रचा ली, जबकि फातिमा ने गुलबहार निवासी कंपिल के साथ निकाह किया।
हसीना बेगम ने कमालगंज के रहने वाले इदरीश और हुमैरा ने कायमगंज के रहने वाले इकरार अहमद के साथ निकाह कर लिया और यह पांचों यहीं रहने लगीं। जावेद अख्तर ने इन लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन भी करा दिया। आफिया पत्नी असद अली कैंसर से पीड़ित हो गई। नतीजतन 11 जनवरी 2016 को उसकी अलीगढ़ अस्पताल में मौत हो गई।
मौत के उपरांत तक आफिया पत्नी असद अली को भारतीय नागरिकता नहीं मिली और वह लगातार अपने वीजा की अवधि मरते वक्त तक बढ़वाती रही। अन्य पाकिस्तानी महिलाएं भी अपनी वीजा की अवधि बढ़वाती रहीं। सोफिया पत्नी अतर अली को 25 जनवरी 2005 में भारतीय नागरिकता मिल गई, जबकि फातिमा पत्नी गुलबहार को 18 दिसंबर 2006 में भारत की नागरिकता दे दी गई।
हसीना को 20 अक्तूबर 2006 को भारतीय नागरिक का करार मिला और हुमैरा पत्नी इकरार को 26 अक्तूबर को भारतीय नागरिकता मिल गई। भारतीय नागरिकता मिलने के बाद यह पाकिस्तानी महिलाएं अब अपने-अपने पतियों के सा
थ रह रही हैं लेकिन भूमिगत हुए पाकिस्तानियों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।
समझा जाता है कि उम्रदराज रहे यह अधिकांश पाकिस्तानी मर चुके होंगे और कुछ आज भी भीड़भाड़ में छिपे हुए हैं। फिलहाल पाकिस्तानी शादाब अख्तर के गायब होने से खुफिया विभाग यहां मौजूद पाकिस्तानियों की पत्रावली खगांगलने में जुट गया है। एलआईयू इंस्पेक्टर सीपी सिंह का कहना है कि उनके यहां कोई भी पाकिस्तानी बिना वीजा और पासपोर्ट के नहीं रह रहा है। इस पर विभाग गहन जांच कर रहा है। पाकिस्तानी शादाब अख्तर लापता है, जिसकी तलाश सरगर्मी से की जा रही है।