जिला व सेंट्रल जेल में क्षमता से ज्यादा कैदी हैं। स्टाफ की तादाद स्वीकृत
पदों से कम है। इससे दबंग कैदी तो मजा काट रहे हैं। बाकी केे लिए हालात
नारकीय हैं। भीड़भाड़ से जेलों में मानवाधिकार कानून भी ठेंगे पर हैं।
सेंट्रल जेल में क्षमता से 584 कैदी ज्यादा हैं। इससे बैरकों में जरूरत से
ज्यादा कैदी ठूंसे गए हैं। एक बैरक में ज्यादा कैदियों के रहने से इनके
बीच अक्सर विवाद होता है। इससे इनमें झगड़े की नौबत आ जाती है। दबंग कैदी
अपने रसूख से बैरक में चुनिंदा कारिंदों को ही टिकने देते हैं। कैदी ज्यादा
हैं तो वहीं स्टाफ कम है। सेंट्रल जेल में स्वीकृत पदों के मुकाबले 180 का
स्टाफ कम है।
जिला जेल का हाल भी सेंट्रल जेल की तरह ही है। यहां
क्षमता से 455 कैदी ज्यादा हैं। यहां भी दबंग बंदियों की मौज है।
बाकी
बैरकों में भीड़ से बंदी मुश्किल में हैं। जिला जेल में सात बंदियों के
स्थानांतरण के लिए लिखा गया है। इन्हें अनुमति मिलती नहीं लग रही है। यहां
भी स्टाफ का टोटा है। यहां 90 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 43 पदों पर ही
तैनाती है। ऐसे में इन्हें संभालना भी जेल प्रशासन के लिए समस्या है।
यह हो रहीं दिक्कतें
- एक बैरक में तादाद से ज्यादा बंदियों को रखने से क्षय और चर्म रोग के मरीज बढ़ रहे ।
- बैरक में बंदियों की ज्यादा संख्या से अक्सर झगड़े की नौबत आ जाती है।
- स्टाफ कम होने से इनकी निगरानी नहीं हो पाती है।
- दबंग कैदी अपनी सहूलियत के लिए बैरक में दूसरे बंदियों को टिकने नहीं देते।
सेंट्रल जेल
क्षमता 1610
मौजूदा स्थिति 2194
अतिरिक्त कैदी 584
स्वीकृत पद 265
तैनाती 85
जिला जेल
बंदियों की क्षमता 846
मौजूदा स्थिति 1301
अतिरिक्त कैदी 455
स्वीकृत पद 90
तैनाती 43
सेट्रल
जेल में क्षमता से ज्यादा कैदी हैं। ऐसी स्थिति सभी जगह है। ऐसे में इनके
ट्रांसफर की समस्या बनी हुई है। फिर भी अधिकारियों से बात की जाएगी।
राजेश कुमार, जेलर सेंट्रल जेल
जिला जेल में बंदियों की संख्या ज्यादा है। सात बंदियों के गैर जेल में स्थानांतरण के लिए लिखा गया है।
राकेश कुमार, अधीक्षक, जिला जेल