जूनियर स्कूलों के प्रधानाध्यापक पदों पर पदोन्नति के लिए शुरू हुई
प्रक्रिया के तहत बीएसए कार्यालय में महिला व विकलांग शिक्षकों से विकल्प
पत्र भरवाए गए। काउंसलिंग के लिए बुलाई गई 60 महिलाओं में 52 और छह विकलांग
टीचरों ने विकल्प पत्र भरे। शिक्षकों ने पदोन्नति में धांधली का आरोप
लगाते हुए कहा कि रिक्त पदों की चस्पा सूची से कई स्कूलों
के नाम गायब हैं।
इसको लेकर बीएसए के सामने दो शिक्षक नेताओं में नोकझोंक हो गई। इनको
समझाकर शांत किया गया। पदोन्नति में मनमानी की शिक्षकों ने डीएम से शिकायत
की है। जूनियर स्कूलों के 300 प्रधानाध्यापक पदों पर प्राइमरी के
प्रधानाध्यापक और जूनियर के सहायक अध्यापकों की पदोन्नति होनी है। इसके लिए
मंगलवार को 60 महिला
और 6 विकलांग शिक्षकों को विकल्प पत्र जमा करने के
लिए बीएसए कार्यालय में बुलाया गया था। प्रधानाध्यापक केे रिक्त पदों की
सूची कार्यालय के बाहर चस्पा की गई। महिला और विकलांग टीचर सूची देख कर
हैरान रह गए। आरोप है कि सूची से वे स्कूल गायब हैं जो सड़क किनारे हैं और
जहां पहुंचना आसान है। इसका शिक्षकों ने विरोध किया। इसको लेकर दो
शिक्षक
नेता बीएसए के सामने आपस में भिड़ गए। इनका कहना था कि रिक्त प्रधानाध्यापक
पदों की जो सूची जारी की गई, उसमें से कई विद्यालय गायब हैं। बढ़पुर
विकास खंड में 15 जूनियर विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद रिक्त हैं।
सूची में केवल चार दर्शाए गए हैं। मोहम्मदाबाद में 50 में से 32 स्कूलों
की सूची चस्पा की गई। यही हाल अन्य ब्लाक के स्कूलों
का रहा। जिला
बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह ने बताया कि 60 महिला और छह विकलांगों को
बुलाया गया था। इसमें 52 महिला और छह विकलांग काउंसलिंग कराने आए। दस
फीसदी पदों को छोड़कर 269 पदों पर पदोन्नति की जा रही है। इसके लिए 284
स्कूलों की सूची चस्पा की थी। शिक्षकों के आरोप को लेकर कहा कि जिन स्कूलों
में तीन टीचर
और अनुदेशक तैनात हैं, वहां टीचरों को भेजने की जरूरत नहीं
थी। जिन विद्यालयों में टीचरों की कमी है, उन्हीं स्कूलों में शिक्षक
पदोन्नति कर भेजे जा रहे हैं। लगाए गए आरोप गलत हैं। इस दौरान डायट
प्राचार्य रमेश चंद्र वर्मा और कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। उधर शिक्षक पंकज
शुक्ला, अमित पाठक, स्वदेश कटियार, प्रवेश कुमार, त्रिपुरारी त्रिवेदी,
योगेश यादव,
मनोज कटियार, राजेश कुमार, देवेन्द्र अवस्थी ने डीएम को
शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। इसमें कहा गया कि शिक्षकों की अद्यतन
वरिष्ठता सूची प्रकाशित किए बिना पदोन्नति की जा रही है। जिन शिक्षकों ाका
डिमोशन होना था, उनको भी इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है।
जूनियर का नाम होने का लगाया आरोप
पदोन्नति
प्रक्रिया में जूनियर शिक्षकों के नाम शामिल किए जाने का आरोप लगाया गया
है। शिक्षिका रेनू दीक्षित ने बताया कि वह वर्ष 1999 में शाहजहांपुर से गैर
जनपदीय स्थानांतरण पर आई थीं। इनके बाद सोता बहादुरपुर की टीचर मंजू
चौरसिया वर्ष 2001 में गैर जनपद स्थानांतरण पर आई। इस प्रमोशन प्रक्रिया के
लिए बनाई गई शिक्षकों की सूची से उसका नाम गायब है जबकि मंजू चौरसिया का
नाम शामिल है।