छोटे बेटे की शादी में दो बेटों के शामिल न होने का गम मां सहन नहीं कर सकी। इस वियोग में मां की ह्रदयगति रुक गई और उसकी सांसें हमेशा-हमेशा के लिए थम गईं। एक तरफ बहू की डोली आई तो दूसरी तरफ सास की अर्थी श्मशान घाट के लिए रवाना हुई।
नगर के मोहल्ला छपट्टी निवासी रामलडै़ते बाथम के सात पुत्र हैं। इनमें रामबरन सबसे छोटा है। रामलड़ैते के दो पुत्र सतीश कुमार और राजाराम परिवार में अनबन के कारण अलग मोहल्ला गढ़ी में रहते हैं। रामबरन की बारात बुधवार को कलान के गांव रिषियाबाद जानी थी। मंगलवार को रामबरन का तिलक समारोह था।
इस समारोह में मोहल्ला गढ़ी में रहने वाले उसके दोनों भाई शामिल नहीं हुए। बेटों के शामिल न होने से मां रामबेटी सुबह से ही गुमसुम थी। शाम को तिलक समारोह की दावत चल रही थी। लोग डीजे की धुनों पर नाच रहे थे। इसी दौरान रामबेटी को दिल का दौरा पड़ गया।
परिजन उन्हें लेकर एक निजी चिकित्सालय पहुंचे, जहां डॉक्टर ने रामबेटी को मृत घोषित कर दिया। मां की मौत की खबर सुनते ही खुशियों भरे घर में कोहराम मच गया। बारात की तैयारी में जुटे रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने मंगलवार रात तीन बजे रामबरन को दूल्हा बनाकर विवाह के लिए रवाना किया।
देर रात ही विवाह की रस्में आनन-फानन में पूरी कर बुधवार सुबह करीब 9 बजे रामबरन अपनी दुल्हन को विदा कर घर लाया। सास के शव को देख बहू भी रोने लगी। बहू के घर आने के बाद परिजनों ने सास रामबेटी की अर्थी को अंतिम संस्कार के लिए रवाना किया। परिजनों का कहना है कि सतीश और राजाराम के रामबरन की शादी में शामिल न होने के गम में रामबेटी को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।