फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अब्दुल मोबीन ने 29 साल पुराने दोहरे अपहरण कांड में शुक्रवार को दो लोगों को दोषी करार दिया है। 16 मार्च को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।
शमसाबाद थाना क्षेत्र के मौनी नगला निवासी राजाराम ने फरीदपुर सैदवाड़ा गांव निवासी ब्रह्मादीन से उसकी सोने की डेढ़ तोला हसिली किसी काम के लिए ली थी।
ब्रह्मादीन और उसकी पत्नी ने कई बार वापस करने को भी कहा, लेकिन राजाराम ने बहानेबाजी की। इसी को लेकर दोनों में रंजिश थी। जानकारी के मुताबिक 8 दिसंबर 1988 को सर्वेश यादव पुत्र राजाराम अपने मित्र भौरूआ निवासी बाबा उर्फ जयवीर सिंह के साथ ब्रह्मादीन के घर आए और हसिली दिलाने की बात कह साथ ले गए।
इसके बाद ये सभी लोग खुड़ना खार निवासी भारत सिंह के घर पहुंचे। वहां से भारत सिंह के पुत्र प्रकाश सिंह को भी साथ ले गए। इसके बाद ब्रह्मादीन और प्रकाश सिंह घर नहीं लौटे।
ब्रह्मादीन की पत्नी रेशमा देवी ने सर्वेश और बाबा उर्फ जयवीर सिंह के खिलाफ पति के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।
उधर, भारत सिंह ने अपने पुत्र की खोज शुरू की। 16 दिसंबर 1988 को याकूनपुर गांव के पास पानी भरे गड्ढे में प्रकाश सिंह का शव उतराता मिला और कुछ दूरी पर ब्रह्मादीन का जमीन में गढ़ा हुआ शव मिला। भारत सिंह ने सर्वेश यादव व बाबा उर्फ जयवीर सिंह के खिलाफ पुत्र के अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने इन दोनों मुकदमों की संयुक्त जांच कर दोनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण और हत्या के जुर्म में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केपी सिंह, गजाला तबस्सुम ने दलीलें पेश की।
सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने सर्वेश यादव व बाबा उर्फ जयवीर सिंह को केवल अपहरण का दोषी करार दिया है। दोषियों को 16 मार्च को सजा सुनाई जाएगी।