फर्रुखाबाद। युवक से मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के 11 वर्ष पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) तरुण कुमार सिंह की अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों, लंबी न्यायिक प्रक्रिया और दोषियों के पूर्व आपराधिक इतिहास न होने को देखते हुए उन्हें जेल भेजने के बजाय तीन-तीन वर्ष की परिवीक्षा का लाभ देने के आदेश दिए।
थाना जहानगंज क्षेत्र के न्योदापुर गांव निवासी शिवकुमार अपनी बाइक से सात मार्च 2015 की शाम घर लौट रहे थे। बर्ना खुर्द पुलिया के पास गांव निवासी सुनील, अजीत और महावीर ने उनकी बाइक रोककर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। मारपीट में शिवकुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके बाएं हाथ के अंगूठे में फ्रैक्चर हो गया। आरोपियों पर बाइक तोड़ने, जातिसूचक गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाही के आधार पर अदालत ने सुनील और अजीत को दोषी ठहराया।
तीसरे आरोपी महावीर की मृत्यु होने पर उसके विरुद्ध कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी थी। सजा के प्रश्न पर अदालत ने माना कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और मुकदमे के निस्तारण में लगभग 11 वर्ष लग चुके हैं। इसके चलते दोनों दोषियों को अपराधियों की परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा-4 का लाभ देते हुए तीन-तीन वर्ष की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के जमानती प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि परिवीक्षा अवधि में किसी भी शर्त का उल्लंघन या दोबारा अपराध करने पर उन्हें तलब कर सजा सुनाई जा सकती है।