फर्रुखाबाद। एक्सईएन नलकूप की झूठी रिपोर्ट से जिले के बंद नलकूप तो पानी-पानी हो रहे हैं लेकिन अधिकारियों को लज्जा नहीं आ रही है। जिलेदारों ने जमीनी पड़ताल कर अलग-अलग कारणों से 76 नलकूप बंद बताए हैं। इसके बावजूद एक्सईएन से शासन को सभी 291 नलकूप चालू होने की रिपोर्ट दे दी है। इस झूठी रिपोर्ट से एक्सईएन को कार्रवाई का तनिक भी भय प्रतीत नहीं हो रहा है। ऐसा तब है जब पिछले एक्सईएन ऐसी ही झूठी रिपोर्ट भेजने पर हटाए गए थे।
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने पिछले दिनों नलकूपों की रिपोर्ट शासन को भेजी थी। जिसमें सभी 291 राजकीय नलकूप चालू दिखाए गए थे। डीएम की रिपोर्ट के बाद शासन की टीम नलकूपों का सत्यापन करने आई थी। टीम में शामिल अधिकारियों को कई नलकूप बंद मिले थे। लापरवाही बरतने पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता ओपी गुप्ता को हटाकर राकेश कुमार को चार्ज दे दिया गया था।
गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारी पर तो कार्रवाई हो गई लेकिन नलकूप ठीक नहीं कराए गए। नलकूप विभाग के जिलेदार द्वितीय ने 10 सितंबर को एक्सईएन को कई नलकूप बंद होने की रिपोर्ट दी। इसमें विद्युत दोष से धीरपुर, नदौरा, पखना, नगला पूठा, बराकेशव, बरखिरिया, सिठौली, जाजपुर गोवा, बनकटी, कान्हेपुर, अर्जुनपुर, गैसिंगपुर, मेरापुर, टैंक व पाइप लाइन खराब होने से मीरपुर, जैतपुर, कान्हेपुर, थ्यूरिया, नगला तबलदार, मेरापुर, संकिसा और नाली खराब होने से बदनपुर, सिनौड़ा पृथ्वी, संतोषपुर, खिरिया व दाउदपुर नगला बाग के नलकूप बंद बताए गए हैं।
इसी तरह जिलेदार चतुर्थ की 13 सितंबर को दी गई रिपोर्ट में कायमगंज क्षेत्र में 20 नलकूप बंद बताए हैं। 30 अन्य नलकूप भी खराब हैं। कुल 76 नलकूप बंद होने की रिपोर्ट एक्सईएन को दी गई है। किंतु एक्सईएन ने फिर सभी 291 नलकूप चालू होने की रिपोर्ट शासन को भेजी है।
वर्जन
जिले में नलकूपों में काफी सुधार हुआ है। एक-दो नलकूपों को छोड़कर सभी चालू हैं। नलकूपों की प्रति महीने रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। जो भी कमियां हैं, उन्हें दुरुस्त कर लिया जाएगा।
-राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता
पैसे लेकर लिपिकों को बांटे गए पटल
फर्रुखाबाद। नलकूप विभाग में नियमों को ताख पर रखकर लिपिकों से रुपये लेकर मनमाने तरीके से पटल आवंटित कर दिए गए। शिकायत पर जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता से जवाब मांगा है।
वरिष्ठ सहायक राघवेंद्र सिंह गंगवार ने जिलाधिकारी से शिकायत की कि अधिशासी अभियंता ने उन्हें किसी ऐसे पटल का चार्ज नहीं दिया, जिस पर वह काम कर सकें। जबकि उनसे जूनियर लिपिकों से 10-10 हजार रुपये लेकर तीन-तीन पटलों का चार्ज दे दिया है। सात कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें एक पटल का भी चार्ज नहीं दिया गया। वरिष्ठ लिपिक राजेश कुमार को तीन वर्ष से काम करने का मौका नहीं दिया गया। शिकायत में यह भी कहा कि वरिष्ठ सहायक निर्दोष कुमार ने 30 हजार रुपये में पटल खरीदे। संजीव कुमार गुप्ता, सचिन कटियार को 10-10 हजार रुपये में पटलों का चार्ज दिया गया। शैलेंद्र सिंह से रुपये न मिलने पर पटल का चार्ज छीनकर दूसरे लिपिक को दे दिया गया।
वरिष्ठ सहायक पवन कुमार को शासन से ट्रांसफर होने के बावजूद अधिशासी अभियंता ने रिलीव नहीं किया। राघवेंद्र सिंह गंगवार ने जिलाधिकारी से पटल आवंटन में मनमानी करने के मामले में कार्रवाई की मांग की है। इस पर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता से प्रकरण की आख्या तलब की है। अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि शिकायत झूठी है। जिलाधिकारी को वह जवाब लिखकर भेज रहे हैं।