फर्रुखाबाद। राज्य सड़क परिवहन निगम किराया बढ़ाकर यात्रियों की जेब भले ही काट रहा हो, मगर सुविधाओं के नाम पर सब कुछ शून्य सा है। बसें धक्कापरेड, सीटें भी पूरी नहीं। आपातकाल के लिए बसों में न तो फर्स्ट एड बाक्स है और न ही शिकायत पेटिका। बसों में स्टेपनी तो दूर, जैक, पाना भी नहीं है। लिहाजा टायर पंक्चर होने पर घंटों खड़े रहना मजबूरी होती है। बस अड्डे का आलम यह है कि टोटियां लीकेज होने से पानी बहता रहता है। यही नहीं पीने के पानी के स्थलों पर गंदगी की मोटी परत जमी होने से संक्रमण की आशंका बनी हुई है।
शुक्रवार को दोपहर करीब 12 बजे बस संख्या यूपी 76के-1910 आगरा गई। उसका सेल्फ काम न करने से आधा घंटे से अधिक समय तक स्टार्ट ही खड़ी रही। इसके पीछे लगी बस संख्या यूपी 76के-0649 भी धक्कापरेड थी। यह बस तो करीब एक घंटे तक स्टार्ट खड़ी रही। इसके बाद आगरा के लिए रवाना हुई। इन बसों में न तो स्टेपनी थीं और न ही फर्स्ट एड बॉक्स और जैक-पाना आदि कुछ भी नहीं था। हद तो यह हो गई कई सीटें फटी थीं और एक में तो एक सीट ही गायब थी।
‘पुरानी बसें दो-चार दिन खड़ी हो जाती हैं, तो बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है। इसलिए किसी में दिक्कत आई होगी। स्टेपनी 25 प्रतिशत गाड़ियों में नहीं हैं। टायर मिलते ही उपलब्ध करा दी जाएंगी। फर्स्ट एड बाक्स स्टेशन इंचार्ज उपलब्ध कराते हैं। चालक-परिचालक जो कंपलेंट करते हैं, उसका समाधान करने की कोशिश करते हैं।’ ---विजेंद्र सिंह, फोरमैन, रोडवेज वर्कशाप फतेहगढ़।