शंकरपुर गांव के निकट बेकाबू ट्रैक्टर के पलटने से उसके नीचे आए अधेड़ चालक की दबकर मौत हो गई। वहीं, अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही के आरोप लगाकर तीमारदारों ने डॉक्टरों से अभद्रता की। किसी भी पक्ष ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है।
थाना कंपिल क्षेत्र के गंाव पट्टी मदारी निवासी रनवीर (50) पुत्र मोतीलाल मंगलवार को किसी काम से ट्रैक्टर लेकर गांव सिवारा की तरफ जा रहा था। शंकरपुर गंाव के पास ट्रैक्टर असंतुलित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया।
इस बीच रनवीर ने ट्रैक्टर से कूदकर बचने का प्रयास किया। लेकिन संतुलन बिगड़ जाने से वह ट्रैैक्टर में दब गया। उसकी चीख पुकार सुनकर आसपास के दौड़कर उसके पास पहुंचे। सूचना पाकर परिजन भी मौके पर आ गए। घायल रनवीर को ट्रैक्टर से निकालकर कायमगंज सीएचसी में भर्ती कराया गया।
यहां कुछ देर बाद डॉ. अमरेश कुमार ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसी दौरान रनवीर के परिजन उसके जिंदा होने व इलाज में लापरवाही की बात कहकर हंगामा करने लगे। उनके समर्थन में काफी संख्या में अधिवक्ता इक्कठा होकर सीएचसी आ गए। डॉक्टरों से रनवीर को रेफर करने की बात करने लगे। वहीं डॉक्टरों ने कहा कि रनवीर की मौत हो चुकी है तो उसका इलाज या रेफर क्यों करें।
इस बात पर मृतक के परिजन व कुछ अधिवक्ताओं ने डॉक्टरों के साथ गाली गलौज शुरू कर दी। इससे सीएचसी में अफरा तफरी का माहौल पैदा हो गया।
विवाद व गाली गलौज होने की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शंात कराया।
परिजन मिथलेश का आरोप था कि रनवीर की नब्ज चल रही थी लेकिन डॉक्टरों ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए उसे मृत घोषित कर दिया। जब कहा कि यह तो जिंदा हैं तो डॉक्टर गाली गलौज करने लगे।
सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अनुराग वर्मा ने बताया कि मृतक के परिजन रेफर करने के लिए दबाव बना रहे थे। रेफर करने से मना करने पर तीमारदार व उनके साथ आए वकील अभद्रता करने लगे। उन्होंने इस संबंध में सीएमओ राकेश कुमार व एसडीएम अजीत कुमार को अवगत कराया है।