सीएचसी से प्रसूता की छुट्टी कराने को लेकर तीमारदारों का महिला स्वास्थ्य कर्मियों से विवाद हुआ। इस दौरान तीमारदारों ने सुपरवाइजर और उसके पति से हाथापाई कर दी। परिजन जच्चा व बच्चा को जबरन अस्पताल से ले गए। पुलिस ने तीमारदारों को जमकर हड़काया। चिकित्सा प्रभारी ने आशा बहू की प्रोत्साहन राशि व प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना की चेक न देने के निर्देश दिए हैं।
थाना व कसबा के रहने वाले दीपू की पत्नी श्रुति को 21 जुलाई को आशा बहू ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। 23 जुलाई को श्रुति ने पुत्र को जन्म दिया। सोमवार को दीपू ने पत्नी की छुट्टी करने के लिए कहा तो स्टाफ नर्स संघमित्रा ने मना कर दिया। इस पर दीपू के साथ आए गांव के मुनेश सक्सेना ने छुट्टी करने का दबाव बनाया। इसी बात पर मुनेश और सुपरवाइजर ज्योति के बीच कहासुनी होने लगी। मामला बढ़ने पर मुनेश की ज्योति और उसके पति इंद्रजीत से हाथापाई हो गई। इसमें इंद्रजीत चुटहिल हो गया।
इसके बाद दीपू और मुनेश जबरन जच्चा-बच्चा को अस्पताल से घर ले गए। सुपरवाइजर ज्योति ने मामले की सूचना थाना पुलिस को दी। एसओ राजबहादुर सिंह ने दीपू व मुनेश को मौके पर बुलाया और जमकर फटकार लगाई। दीपू से लिखित में ले लिया गया कि वह अपनी मर्जी से पत्नी की छुट्टी करा रहा है। चिकित्सा प्रभारी मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी ने बताया कि दीपू अपनी मर्जी से श्रुति की छुट्टी कराकर ले गए हैं। इसलिए उसे जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि नहीं दी जाएगी। आशा ममता देवी को भी प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी। एसओ ने बताया कि तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।