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Farrukhabad News: जाम से मिलेगी निजात, गंगा, रामगंगा व काली नदी पर बनेगा फोरलेन पुल

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फर्रुखाबाद। 730सी हाईवे पर जाम से निजात के लिए गंगा, रामगंगा व काली नदी सहित सात फोरलेन पुल बनाने की स्वीकृति मिल गई है। डीपीआर बनाने के लिए सर्वे भी शुरू कर दिया गया। इन पुलों के निर्माण पर करीब 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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इटावा-बरेली हाईवे का चौड़ीकरण कर 730सी फोरलेन हाईवे बन रहा है। सड़क चौड़ी होने के बाद वाहनों का दबाव बढ़ा तो अक्सर गंगा, रामगंगा व कालीनदी पुल पर जाम लग जाता है। इसके अलावा नेकपुर चौरासी रेलवे ओवरब्रिज व तीन छोटे पुलों की चौड़ाई कम होने से जाम की स्थिति बन रही है।
लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से पुलों के निर्माण की मंजूरी मिल गई है। पांचालघाट स्थित गंगा, रामगंगा, कालीनदी, नेकपुर व तीन माइनरों सहित सभी सात फोरलेन पुल का निर्माण कराया जाएगा। डीपीआर तैयार करने के लिए दिल्ली की कंपनी टीएसपीएल को 67 लाख रुपये ठेका दिया गया है। फरवरी 2025 तक डीपीआर तैयार करने के आदेश हैं। 1800 मीटर लंबे सभी पुलाें के निर्माण में करीब 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। (संवाद)
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किस पुल की कितनी होगी लंबाई
सभी पुलों की चौड़ाई अभी करीब 10-10 मीटर है। फोरलेन पुल का निर्माण होने से इनकी चौड़ाई 30 से 32 मीटर हो जाएगी। फोरलेन पुल निर्माण के लिए काली नदी पर 130 मीटर लंबाई, पांचालघाट गंगा नदी पुल की 640 मीटर, रामगंगा पुल की 680 मीटर, नेकपुर चौरासी रेलवे ओवरब्रिज की 49 मीटर निर्धारित है। इसके अलावा माइनर ब्रिज में डबरी पुल, बघार पुल व महमदपुर सहित तीनों पुलों की 100 मीटर लंबाई है। डीपीआर तैयार होने पर इन पुलों की लंबाई और बढ़ने की भी संभावना है।

10.752 हेक्टेयर भूमि होगी अधिग्रहीत
फोरलेन पुलों के निर्माण के लिए 10.752 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत करनी होगी। यह भूमि गांव मदनपुर, सींगनपुर, ढिलावल, बर्नाबुजुर्ग, भाऊपुर, नेकपुर, सोताबहादुरपुर, कटरी सोताबहादुरपुर, चाचूपुर जटपुरा, महमदपुर गढि़या व डबरी पुल निर्माण के लिए अधिग्रहीत की जाएगी। इसमें किसानों के अलावा सरकारी भूमि भी शामिल है।

1800 मीटर लंबाई के सात फोरलेन पुल निर्माण के लिए सर्वे कार्य चल रहा है। नामित दिल्ली की फर्म को फरवरी 2025 तक डीपीआर तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। डीपीआर के आधार पर इस्टीमेट बनाया जाएगा। इसमें निर्माण पर खर्च होने वाली धनराशि का भी अनुमान लग जाएगा। इसी के बाद निविदा के तहत फर्म नामित कर पुलों का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
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- शिवम सिंह, परियोजना निदेशक एनएचएआई
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