डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल में ए और ओ निगेटिव ग्र्रुप का ब्लड नहीं है।
बी निगेटिव व ए पॉजिटिव ग्रुप के ब्लड की उपलब्धता भी तीन-तीन यूनिट ही है।
ऐसे में इन ग्रुपों केे जरूरतमंद आ जाएं तो इनकी जान पर बन सकती है।
जिम्मेदारों का कहना है कि ऐसे समय में डोनरों से संपर्क करने की व्यवस्था
है। अगर डोनर सही समय पर न मिलें तो खतरे का अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता
है।
राममनोहर लोहिया अस्पताल में इस समय केवल 37 यूनिट ब्लड है। यहां
जिले के अलावा कन्नौज, शाहजहांपुर, हरदोई, एटा, बंदायू जिलों से मरीज इलाज
के लिए आते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते
हैं। निजी अस्पतालों में ब्लड बैंक नहीं है। गंभीर हालत में लोहिया अस्पताल
का ब्लड बैंक ही इनकी भी आखिरी उम्मीद है। ऐसे में
यहां ब्लड की कमी से
मरीज की जान पर बन आना स्वाभाविक है। अस्पताल के ही रिकार्ड के मुताबिक रोज
करीब 10 यूनिट ब्लड की मांग रहती है। इन हालातों ए निगेटिव व एबी
पॉजिटिव और एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप की मांग आ जाने पर संकट होना तय है।
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ग्रुप का ब्लड न होने से डोनर रजिस्टर में दर्ज रक्त दाताओं से संपर्क
किया जाता है। वह रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। कई लोगों के ब्लड जांच के
लिए रखे हुए हैं। इनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। -डा. राजेश तिवारी
ब्लड की उपलब्धता
ग्रुप मात्रा
ए पॉजीटिव 3 यूनिट
बी पॉजीटिव 12 यूनिट
ओ पॉजीटिव 18 यूनिट
एबी पॉजीटिव 1 यूनिट
ए निगेटिव निल
बी निगेटिव 3 यूनिट
ओ निगेटिव निल
एबी निगेटिव निल