कमालगंज। गणेश महोत्सव महापर्व में बुधवार गजानन दरबार भक्ति और संस्कृति का रंगमंच बना। गणपति बप्पा मोरया, देवा ओ देवा गणपति देवा जयघोष के बीच प्रथम पूज्य भगवान गणेश की महापूजा हुई। आरती के स्वरों में श्रद्धालु भक्ति में गहरे से डूब गए। फिर सांस्कृतिक रंगमंच का वैभव झांकियों में खिल गया। द्रोपदी चीरहरण में भक्ति, न्याय और धर्म का जयगान हुआ तो अघोरी स्वरूप में शिव के तांडव नृत्य ने रोमांच और भक्ति का डंका बजाया।
कस्बे के 17वें गणेश महोत्सव में दसवें दिन भगवान गणेश के शृंगारमयी दर्शन में भक्तजन मोहित हो गए। सुबह के कार्यक्रम में जहां भारी भीड़ उमड़ी। वहीं, रात्रिकालीन कार्यक्रम में सड़क से लेकर महोत्सव स्थल तक दीपावली जैसी दमकतीं-चमकतीं ज्योतिर्मय लड़ियों की सतरंगी रोशनी ने महापर्व का उल्लास चरम पर पहुंचा दिया।
पूजन के बाद पहली झांकी द्रौपदी चीरहरण की प्रस्तुति हुई। कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण अभिनय कला से मोह लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी पर कृपा बरसाकर धर्म की जीत का जयघोष किया तो जयजयकार गूंजने लगी। अघोरी झांकी में शिव ने अघोरी के स्वरूप में डमरू की धुन पर तांडव नृत्य किया। शिव बरात में जहां पंडाल और पंडाल के बाहर खड़े श्रद्धालु भर-भर कर झूमे, वहीं, मंच पर भूत-प्रेत भी नाचे। गोपाल विश्नोई, प्रबल वर्मा डमडम, नन्हीं पंडित, प्रतिबन वर्मा नीटू, सतीश माहौर, अनुभव गुप्ता, रवि प्रकाश गुप्ता, अनूप गुप्ता, राकेश गुप्ता, उज्ज्वल हलवाई, चंदन गुप्ता, संतोष गुप्ता, राघव शुक्ला भी रहे। कार्यक्रम विराम पर महाप्रसादी का वितरण हुआ।