फर्रुखाबाद। सातनपुर मंडी के तत्कालीन सचिव को भ्रष्टाचार के मामले में उपनिदेशक ने निलंबित कर दिया है। एक ही फर्म की द्वितीयक पर्ची पर गेटपास काटकर लाखों रुपये का खेल किया गया। इसके साथ ही मंडी के दो लिपिकों पर भी निलंबन की गाज गिरी है।
शहर की सातनपुर आलू मंडी में फर्जीवाड़ा होने पर अमर उजाला ने 19 जून के अंक में, फर्जीवाड़ा : मंडी से कार व बाेलेरो से ढोए गए हजारों क्विंटल आलू, शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल ने भी अनियमितता व मनमाने कार्य करने में सचिव के खिलाफ कई पत्र भेजे थे। इसका मंडी निदेशक ने संज्ञान लिया। 20 जून को मंडी उपनिदेशक कानपुर ने कमेटी के साथ सातनपुर मंडी पहुंचकर जांच की तो फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
जांच पूरी होने के बाद मंडी उपनिदेशक संतोष कुमार ने 20 अगस्त को तत्कालीन सचिव रामसेवक वर्मा को निलंबित कर दिया। वह इन दिनों कानपुर की वरीपाल मंडी में निरीक्षक पद पर तैनात थे। उपनिदेशक ने निलंबन आदेश में तत्कालीन सचिव रामसेवक वर्मा पर 15 आरोप लगाए हैं। इसमें जनपद औरैया के रामपुर खास, मढ़ा कुटरकोट अछल्दा की फर्म आरके ट्रेडर्स से दुरभि संधि के चलते दो लाख 80 हजार 590 क्विंटल आलू की द्वितीयक पर्ची काटने, आलू की अंडर रेटिंग, फर्जी कागजों पर फर्म राधे ट्रेडर्स का लाइसेंस जारी करने, निजी लाभ के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को अभिलेख न देकर गुमराह करने, मुख्य रोकड़ बही परीक्षण के लिए प्रस्तुत न करना आरोप लगाए गए।
इसके अलावा लिपिकों से रोकड़ बही पूर्ण न कराना, नियम विरुद्ध तरीके से फर्मों का प्रोपराइटर बदलना आदि आरोप हैं। उपनिदेशक ने तत्कालीन मंडी सचिव रामसेवक वर्मा को वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता, मंडी शुल्क को क्षति पहुंचाने, अभिलेखों में हेराफेरी, आदेशों की अवहेलना में निलंबित कर कृषि उत्पादन मंडी समिति कानपुर से संबद्ध कर दिया। विभागीय कार्रवाई के लिए कानपुर मंडी सचिव को जांच अधिकारी नामित कर शीघ्र आरोपपत्र दाखिल करने के आदेश दिए।