बौद्ध भिक्षुओं को वस्त्र बांटतीं बाग्मो डिस्की।
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संकिसा में हो रही बौद्ध के प्रर्वचनों की वर्षा में अनुयायी भन्ते और भिक्षु सराबोर हो रहे है। यहां चल रहे अंतर्राष्ट्रीय अविधम्मा कार्यक्रम के समापन अवसर पर अमेरिका से आई बाग्मो डिस्की ने बौद्ध स्तूप के ऊपर बैठकर बौद्ध अनुयायियों को तथागत की देशनाओं की जानकारी दी।
भिक्षु संघ प्रमुख डा. उचावना महाथेरो के प्रवचन में अविधम्मा अपने दैनिक जीवन में उतारने के लिए कुशल एवं अकुशल कर्म धर्म प्रज्ञा से पहचाने जाते हैं। प्रज्ञा से पहले शील व उसके बाद समाधि की स्थिति आती हैं। जीवन में 10 कुशल कर्म अकुशल धम्मा में आते हैं। कुशलशील सम्पन्न व्यक्ति ठीक प्रकार से समझ सकते हैं।
अकुशल धर्म व्यक्ति को। कार्यक्रम मेें कहा कि अकुशल व्यक्ति शीलवान नहीं बना सकता। इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने संकिसा के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि जब बुद्ध तावतिंस लोक से संकिसा में आये तो सर्व प्रथम सारी पुत्र और अविधम्म का उपदेश दिया। उसके बाद 300 आर्हत भिक्षुओं को उपदेश देकर दीक्षित किया। उन्होंने कहा कि तावतिंस लोक से संकिसा में आए।
स्वर्ग का एक दिन मनुष्य लोक के 50 दिन के बराबर होता है। कार्यक्रम की मुख्य संयोजिका बाग्मो डिस्की अमेरिका ने कहा कि उनके पिता तारथांग तुलकू भी भिक्षु हैं । उन्हीं की प्रेरणा से ही यह तीन दिवसीय चैनटिंग शैरेमनी का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है। मेरे पिता ने बौद्ध धर्म की शिक्षा दीक्षा के लिए एक टीचर रख रखा हैं। इसी क्रम में बाग्मो डिस्की ने बताया कि तीन दिन का यह कार्यक्रम बहुत ही अच्छा चला है।
सुरेश बौद्ध का अच्छा योगदान रहा । कार्यक्रम में सभी ने आए हुए लोगों को समझाकर बौद्ध धर्म की पूजा व लोगों को जागरूक करने का काम किया। बताया कि रुकने व खाने की पूरी व्यवस्था वाई सीएसके राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश बौद्ध ने बहुत ही अच्छी तरह से की हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष इस कार्यक्रम को और भव्यता प्रदान की जाएगी। इस अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटिक पूजा को हर वर्ष अनेकाें देशों के लोग भाग लेने आते हैं।
इसी क्रम में आज चल रही इस पूजा को संकिसा स्तूप के दर्शन को आए। बेल्जियम के यात्रियों ने स्तूप की परिक्रमा की।