कमालगंज। गंगा गली हनुमान मंदिर के निकट गढ़िया में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस रुक्मिणी मंगल, सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष कथा का वर्णन किया गया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत में सुदामा चरित्र निस्वार्थ मित्रता का प्रतीक है। इस प्रसंग से आज के लोगों को प्रेरणा लेकर मित्रता के ऊंचे मानदंडों को स्थापित करना चाहिए।
बृज क्षेत्र के कथाव्यास पंडित चंदन पाराशर महाराज ने सुदामा चरित्र प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र श्रीमद्भागवत और भारतीय संस्कृति में वर्णित निस्वार्थ मित्रता, प्रेम और भक्ति का भावुक प्रसंग है। यह प्रसंग बताता है कि कैसे सांसारिक ऊंच-नीच से ऊपर उठकर ईश्वर अपने भक्त को कभी अकेला नहीं छोड़ते। सच्ची दोस्ती में अमीरी-गरीबी कोई मायने नहीं रखती। कथा के दौरान यह माया जादूगरनी है सारे जग को रही नचाये, ये चमक ये दमक मधुवन में महक सब कुछ सरकार तुम्हीं से है, बिन सत्संग विवेक न होई रामकृपा बिनु सुलभ न सोई आदि प्रेरक गीत व भजन गाए गए। जानकी प्रसाद शाक्य व मिथलेश ने पूजन कराया। (संवाद)