कमालगंज। गांव महमदपुर अचला के जांबाज सिपाही राशिद अली कोरोना के खिलाफ चल रहे युद्ध के सच्चे कर्म योद्धा हैं। वह इस समय कानपुर के सचेंडी थाने में तैनात हैं। उन्होंने अपने घर पर संदेश भेजा कि 30 मई को होने वाली मेरी शादी स्थगित कर दी जाए ।
जब तक कोरोना की महामारी से देश को निजात नहीं मिल जाती ,तब तक वह निकाह की रस्में निभाने अपने गांव नहीं आएंगे। फर्ज के आगे शादी की रस्मों को न्योछावर करने वाले सिपाही का हर कोई मुरीद हो गया है। 29 मई को होने वाली बड़े भाई की भी शादी टाल दी गई। सिपाही को एसएसपी ने बेहतर काम के लिए सम्मानित भी किया है।
महमदपुर अचला गांव के शाकिर अली के पुत्र राशिद अली ने कस्बे के फिरोज गांधी इंटर कालेज से 12 वीं और आरपी डिग्री कालेज से स्नातक की पढ़ाई की। 2011 में वह पुलिस में कांस्टेबल बने। इस समय वह कानपुर के सचेंडी थाने में तैनात हैं। पिछले साल जून में निनौरा के पूर्व प्रधान गफ्फार की पुत्री नौशीन बानो से उनकी शादी तय हुई थी। 30 मई को निकाह होना था। वर व वधू दोनों पक्षों ने बैंडबाजा, हलवाई व अन्य तैयारी पूरी कर लीं। इसी बीच मार्च में कोरोना महामारी के कारण लाकडाउन से पुलिस कर्मियों के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गई। राशिद ने फर्ज को तवज्जो देकर निकाल टाल दिया।
परिजनों ने बेटे को इस निर्णय के लिए मुबारकबाद दी। परिजनों ने लड़की पक्ष को बताया तो वह भी सहर्ष तैयार हो गए। सिपाही राशिद की होने वाली पत्नी नौशीन बानो ने कहा कि मुझे इस बात का फक्र है कि उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश हित के लिए शादी टालने का फैसला लिया। राशिद के छोटे भाई शादाम अली ने बताया कि परिवार में दो शादी थीं। भाई राशिद की 30 मई और बड़े भाई आशिक अली की 29 मई को शादी होनी थी। दोनों शादियां परिस्थिति सामान्य होने तक टाल दी गईं हैं। छोटे भाई शादाम ने बताया कि भाई राशिद को एसएसपी कानपुर ने बेहतर काम करने पर सम्मानित किया था।