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मनरेगा का 1.36 करोड़ बाकी, प्रधानों से तगादा कर रहे जॉबकार्ड धारक

Sat, 07 Feb 2015 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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ग्राम पंचायत के चुनाव में जुटे प्रधानों के लिए मनरेगा का फंड बीमारी बन गया है। मनरेगा ने प्रधानाें की साख और इनकी कुर्सी पर दांव धर दिया है। 512 ग्राम पंचायताें का एक करोड़ 36 लाख रुपया बकाया है। जॉबकार्ड धारक बकाया मजदूरी के लिए प्रधानों के दरवाजे पहुंच तगादा कर रहे हैं।
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हालांकि मजदूरी मजदूरों के खाते में सीधे पहुंचती है, लेकिन देर होने के लिए वे प्रधान को ही जिम्मेदार मान रहे हैँ। ऐसे में रोज दरवाजे पहुंचने वाले मजदूर चुनावी तैयारी में जुटे प्रधानों के वोटाें का गणित भी बिगाड़ सकते हैं। मनरेगा के स्टेट फंड में कुल 235 रुपये हैं।

गांवाें में प्रधानी की जंग चालू है। अपने-अपने वोटराें को साधने की जुगत अभी से भिड़ रही है। ऐसे में मनरेगा का बजट न होना प्रधानाें की साख पर बट्टा लगा रहा है। मजदूर पैसे के लिए सुबह-सुबह प्रधानाें के यहां पहुंच जाते हैं। राम जुहार और दुआ सलाम के बाद इनकी मजदूरी की रट शुरू हो जाती है।
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प्रधान के खिलाफ ताल ठाेंकने वाले मजदूराें को चढ़ा देेते हैं कि प्रधान जी ही पैसा नहीं निकलवा रहे, या प्रधान जी ने पैसा खा लिया है। इससे जॉब कार्डधारक ग्राम प्रधान के खिलाफ गांठ बांध रहे हैं। वे दूसरे मजदूरों में प्रधान के खिलाफ प्रचार में भी जुट जाते हैं। प्रधान खुद मानने लगे हैं कि मनरेगा का फंड उनकी कुर्सी के लिए खतरा बन सकता है।

मनरेगा बजट का हाल यह है कि स्टेट फंड में 235 रुपये ही कई दिनाें से हैं। एक माह पहले फंड में 116 करोड़ रुपया आया था। यह पुराने एफटीओ डालने वालाें को भुगतान हो गया। अभी 1 करोड़ 36 लाख रुपया भुगतान होना है। कई ग्राम पंचायताें में तगादाें से परेशान प्रधान मजदूरों की नाराजगी से बचने के लिए

अपनी जेब से भुगतान कर रहे हैं। इनका कहना है कि क्या करें, इनकी जरूरतें पूरी करना भी जिम्मेदारी है। उपायुक्त मनरेगा जनार्दन यादव का कहना है कि मनरेगा में एफटीओ के तहत भुगतान होता है। स्टेट फंड में बजट नहीं है।

केस:1
महमदपुर गढ़िया में 20 मजदूराें का 7 से 10 दिन तक  का लगभग 20 हजार रुपया बकाया यहां भी मजदूर परेशान हैं। प्रधान हाकिम सिंह का कहना है  कि मजदूर उनसे ही तगादा कर देते हैं। इन्हें कभी इलाज तो कभी राशन के लिए पैसाें की जरूरत होती है। ऐसे में मदद करनी पड़ जाती है।  फंड की यह समस्या चुनाव के लिए गंभीर हो सकती है।  

केस: 2
शेराखार गौटिया में  40 मजदूरों का 11 दिन का पैसा बकाया है। बाकी ग्राम सभाआें जैसी ही यहां की तस्वीर है।  प्रधान अरुण शर्मा कहते हैं कि विरोधी मजदूराें को भड़का देते हैं। इनका कहना है कि मजदूराें की जरूरत पर वह उनकी आर्थिक मदद कर देते हैं। इनका भी कहना है कि यह स्थिति पंचायत चुनाव में घातक न हो इसलिए मजदूराें को समझाना भी पड़ता है।

केस: 3
हमीरपुर ग्रामसभा में  25 मजदूराें का 43 हजार रुपया बकाया है। यह तगादा करने प्रधान के घर अक्सर पहुंच जाते हैं। प्रधान बिट्टो देवी का कहना है कि स्टेट फंड में पैसा नहीं है। फंड की दिक्कत चुनाव पर भी असर डालेगी।
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