फोटो-32 कमालगंज स्थित मंडी में ट्रैक्टर ट्राली से उतरता आलू। संवाद
कमालगंज। आलू मंडी में चार दिन में आलू के भाव में 108 रुपये क्विंटल की गिरावट आ गई। वहीं भारी मात्रा में आलू की आमद से दूसरे दिन भी मंडी में जाम की स्थिति रही। आसपास की मंडियों की तुलना में सबसे तेज भाव मिलने की चर्चा से मैनपुरी जनपद का भी आलू मंडी में आया।
कृषि उत्पादन मंडी समिति कमालगंज में 31 दिसंबर को आलू मंडी का भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने उद्घाटन किया था। आलू की बिक्री का भाव नीलामी से तय हो रहा था। पहले दिन बुधवार को 271 से 331 रुपये पैकेट (50 किलो) आलू बिका था। दूसरे व तीसरे दिन 270 से 345 रुपये तक बिका। हालांकि एक किसान के आलू की नीलामी बोली 375 रुपये पैकेट तक पहुंची थी लेकिन अच्छे आलू का भाव 345 रुपये माना गया। इसके बाद नीलामी व्यवस्था बंद हो गई। अब आढ़तों पर लगे आलू को देख कर किसानों से सीधे सौदे होने लगे हैं। चार दिन में अच्छे आलू का भाव लुढ़कते हुए सोमवार को 291 रुपये पर आ गया। सबसे ज्यादा 291 रुपये पैकेट के हिसाब से अहिमा के किसान गौरव राजपूत का आलू बिका। जबकि नीचे में 225 रुपये पैकेट भाव रहा।
व्यापारियों का कहना है कि नीलामी में कुछ लोग देखा-देखी में ऊंची बोली लगाकर मंडी का माहौल खराब कर रहे थे। इसलिए नीलामी से आलू बिक्री की व्यवस्था बंद हो गई। अब आलू के सौदे इस तरह से किए जा रहे हैं कि जिससे किसानों से खरीदा जाने वाला माल बाहर की मंडियों में आसानी से बिक सके और किसान को पैसा मिल सके। नीलामी में ज्यादा दाम लगाने वाले बाद में आढ़त से किसान का माल उठाने से मुकर जाते हैं।
व्यापारी मनोज ने कहा कि कमालगंज मंडी में ऊंचे भाव की शोहरत फैलने से मैनपुरी के बेवर से भी काफी माल आया। रविवार को करीब 40 ट्रक यानी 20 हजार पैकेट से अधिक माल आया था। सोमवार को भी काफी माल आने से मंडी के अंदर जाम की स्थिति रही। गल्ला आढ़ती संघ के पूर्व अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि व्यापारियों और लोडर को एक दिन पहले का आलू अगले दिन अपराह्न दो बजे तक ट्रक में लोड करा लेना चाहिए। जब ट्रैक्टर से मंडी में आलू आने का समय होता है। तब ट्रकों में लोडिंग से रास्ता जाम हो जाता है।