शमसाबाद। फैजबाग में क्षत-विक्षत मिले चांद मियां के शव के मामले में थाना पुलिस की एक और लापरवाही सामने आई है। परिजनों के प्रार्थना पत्र देने के बावजूद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा।
यही नहीं जब रोडवेज बस डिपो के चालक ने बस में छोड़ा बैग युवक के परिजनों को सौंप दिया। इसके बावजूद पुलिस नहीं चेती। 24 अक्तूबर को गांव चिलसरा निवासी चांद मोहम्मद उर्फ चांदमियां दिल्ली से सीतापुर रोडवेज बस से घर लौटने के लिए बैठा था।
ताऊ अली मोहम्मद ने बताया कि भतीजे चांद को उसके ससुर जियासुद्दीन निवासी कटरा कन्नौज ने सीतापुर डिपो की बस में बैठाया था। चांद के पास मोबाइल नहीं था तो ससुर से ही बात होती थी। 25 अक्तूबर को अली मोहम्मद ने जियासुद्दीन को फोन कर बताया कि चांद मोहम्मद घर नहीं पहुंचा। इस पर उन्होंने सीतापुर डिपो के बस चालक का मोबाइल नंबर दे दिया।
अली मोहम्मद ने चालक से बात की तो उन्होंने बताया कि चांद का बैग बस में मिला है। 26 अक्तूबर को चालक ने फैजबाग में अली मोहम्मद को बैग दे दिया। अली ने बताया कि 28 अक्तूबर को उन्होंने थाने में प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस ने चांद मोहम्मद का फोटो लाकर देने को कहा, लेकिन वह देने नहीं गए। इस पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज नहीं की।
थानाध्यक्ष रमेश सिंह ने बताया कि अली मोहम्मद ने चांद मोहम्मद के लापता होने की मौखिक सूचना दी थी। उनसे फोटो व प्रार्थना पत्र देने के लिए कहा, लेकिन वे दोबारा लौटकर नहीं आए। इस वजह से गुमशुदगी नहीं लिखी।