फर्रुखाबाद। बच्चों को बेहतर इलाज देने की मंशा से लोहिया अस्पताल में स्वीकृत 12 बेड की पीडियाट्रिक आईसीयू यूनिट जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
इसे तैयार करने के लिए शासन ने मार्च 2025 का समय निर्धारित कर 15.60 लाख रुपये स्वीकृत कर दिए थे। इसके बावजूद अधिकारी बेपरवाह बने रहे और योजना खत्महो गई।
हद तो तब हुई जब अफसरों ने जून में इसके लिए टेंडर किए। अब दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले गंभीर बच्चों को आईसीयू न होने की बात कहकर रेफर कर दिया जाता है। परिजन निजी अस्पतालों में इलाज पर मोटी रकम खर्च कर रहे हैं।
शासन ने इमरजेंसी कोविड रिस्पॉन्स पैकेज-दो (ईसीआरपी-2) के तहत 29 जनवरी 2025 को लोहिया अस्पताल में 12 बेड की पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार करने की स्वीकृति दी थी। इस पर 15.60 लाख रुपये खर्च किए जाने थे।
योजना का समय 31 मार्च को पूरा होने वाला था। इस संबंध में मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने आदेश जारी कर कहा था कि योजना खत्म होने से पहले इस धन से आईसीयू बेड बनाए जाने के लिए उपकरण, ऑक्सीजन पाइपलाइनें, एसी यूनिट आदि का सामान खरीदने तैयारी कर लें।
इसके बावजूद अस्पताल के जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। लिहाजा योजना ही समाप्त हो गई।