डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर के तहसील दिवस में जाने से मंगलवार को ओपीडी ठप हो गई। इससे मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। तमाम मरीजों को बिना दवा के ही लौटना पड़ा। अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि आने वाले दिनों में इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित होने की आशंका है। ‘अमर उजाला’ ने 29 फरवरी के अंक में अस्पताल की अव्यवस्थाओं को उजागर करके ओपीडी ठप होने की आशंका जताई थी। खबर छपने के दूसरे दिन ही डॉक्टर के अभाव में ओपीडी ठप होने की नौबत आ गई।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कई दिनों से डॉक्टरों का टोटा है। सीएमएस समेत तीन डॉक्टर ही ओपीडी के लिए हैं, इसमें से एक डॉक्टर की इमरजेंसी ड्यूटी लगाई जाती है। सीएमएस के जिम्मे तमाम प्रशासनिक काम होते हैं। ऐसे में एक डॉक्टर पर ही ओपीडी का भार रहता है। मंगलवार को ओपीडी ड्यूटी करने वाले डॉ. बीके दुबे तहसील दिवस में चले गए। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रजेश कुमार व सीएमएस ही अस्पताल में बचे। नेत्र रोग विशेषज्ञ का हर मर्ज के रोगियों का उपचार करना संभव नहीं है। इससे मंगलवार को ओपीडी पूरी तरह ठप हो गई। डॉक्टर न होने से दूर-दूर से आए मरीजों को बिना इलाज व दवा के ही लौटना पड़ा।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. बीबी पुष्कर का कहना है कि बिना डॉक्टरों के अस्पताल चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार अगर दो-तीन ईएमओ ही दे दे तो किसी तरह से काम चलाया जा सकता है। मार्च के पहले ही दिन ओपीडी गड़बड़ा गई। यह हालात डाक्टर के तहसील दिवस में चले जाने से उत्पन्न हुए। डाक्टरों और दवाओं की मांग कई महीने से की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।