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फसल बर्बादी पर एक और किसान ने दी जान

Sun, 19 Apr 2015 11:13 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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कमालगंज में बरसात व ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने और केसीसी ऋण अदा न कर पाने से क्षुब्ध किसान ने फांसी लगा ली। सूचना पर पहुंचे तहसीलदार ने मृतक की फसल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि 25 फीसदी ही गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। ब्लाक क्षेत्र के गांव मकरंदनगर बसहा निवासी देशराज (65) के पास सात बीघा जमीन थी। उसने ढाई बीघा में गेहूं और बाकी में आलू व धान की फसल बोई थी। इसके साथ ही केसीसी ऋण के तहत 80 हजार रुपये ले रखा था।
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कर्ज न चुकाने पर देशराज के नाम आरसी कट चुकी थी। फसल बर्बादी और बैंक का ऋण न चुका पाने से वह परेशान रहता था। पुत्र शीलेंद्र के मुताबिक रविवार को गांव के ही धीरेंद्र सिंह पिता से मिलने आए थे। आम के बाग में इनकी बातचीत हुई। इसके बाद पिता देशराज ने आम के पेड़ से अपनी लुंगी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। नातिन बिट्टू ने जब बाबा देशराज को फांसी पर लटके देखा तो घरवालों को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलने पर थाना पुलिस, नायब

तहसीलदार चूणामणि और लेखपाल नरेशबाबू पाठक मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव नीचे उतरवाया। तहसीलदार ने मृतक के खेत में खड़ी गेहूं की फसल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि 25 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ है। मृतक के तीन
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बेटे और दो बेटियां हैं। शव देख मृतक की पत्नी राजवती का रो-रोकर बुरा हाल था। पुत्र शीलेंद्र ने बताया कि वर्ष 2008 में पिता ने केसीसी से 80 हजार का ऋण लिया था। इसकी आरसी कट चुकी है। बरसात और ओलावृष्टि से फसल भी बर्बाद हो गई। इस दोहरी मार से पिता दुखी रहते थे। इसी से निराश होकर उन्होंने फांसी लगा ली।

इलाज के रुपये खत्म, किसान ने तोड़ा दम
10 बीघा खेत में मात्र नौ क्विंटल गेहूं निकलने से आठ दिन पहले गांव पिथनापुर के किसान को हार्टअटैक पड़ गया। परिजन आगरा में किसान का इलाज करा रहे थे। रुपये खत्म हो गए तो परिजन किसान को घर ले आए। रविवार को किसान की मौत हो गई।  उधर फसल खराब होने के सदमे में एक और किसान की मौत हो गई।

गांव पिथनापुर निवासी आनंद कुमार (40) ने 10 बीघा खेत में गेहूं किया था। 10 दिन पहले उसने गेहूं काटकर खंदाई करवाई तो मात्र नौ क्विंटल गेहूं निकला। बेटे लवकुश के मुताबिक कम फसल देख पिता को हार्टअटैक पड़ा। आगरा में इलाज के दौरान एक लाख रुपये खर्च हो गए लेकिन पिता ठीक नहीं हुए। रुपये खत्म हो जाने के चलते उन्हें बीमारी की हालत में शनिवार को घर ले आए। रविवार सुबह उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर एसडीएम लालजी मिश्र मौके पर

पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि किसान की हार्टअटैक से नहीं, बल्कि बीमारी से मौत हुई है।  लवकुश ने बताया कि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक से पिता ने केसीसी के तहत दो लाख ऋण भी ले रखा था। फसल बर्बादी और कर्ज होने के चलते पिता को हार्टअटैक पड़ गया था।  एसडीएम लालजी मिश्र ने तहसील क्षेत्र के गांव चपरा, गुड़ेरा, रूलापुर और पिथनापुर में पहुंचकर

किसानों की बर्बाद हुई फसल का जायजा लिया। बताया कि इन गांवों में 20 से 25 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ है। 
लेखपाल गांव-गांव जाकर सर्वे कर रहे हैं। रविवार को लेखपालों ने 961 ग्रामीणों की सूची बनाई है।
उधर, थाना मऊदरवाज इलाके के गांव अर्रापहाड़पुर निवासी भरत सिंह (53) के पास 3 बीघा जमीन थी। इस पर उसने

तंबाकू की फसल की थी। बरसात से अधिकंाश  फसल खराब हो गई।  शनिवार की रात इसी सदमे से इनकी मौत हो गई। जानकारी होने पर एसडीएम सदर सुनील कुमार और लेखपाल मौके पर जा पहुंचे। एसडीएम ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की। एसडीएम ने बताया कि जांच पड़ताल के बाद नियमानुसार  मदद दी जाएगी।
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