परिचय दरगाह में फातिहा पढ़ते अकीदतमंद।
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शहर के मोहल्ला शमसेर खानी में हजरत आरिफ अली शाह वारसी के उर्स में कुल व फातिहा के वक्त भारी भीड़ उमड़ी। इससे पहले यहां नातिया मुशायरे की नूरानी महफिल सजी। कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर लोगाें को मंत्रमुग्ध कर दिया। सोमवार को जाने माने बुजुर्ग हजरत आरिफ अली शाह के दो दिवसीय उर्स का अकीदत के माहौल में समापन हुआ। इसमें विभिन्न जनपदों के अकीदत मंदो ने दरगाह में हाजिरी दी और कुरआन की तिलावत कर फातिहा पढ़ी।
इससे पहले असलम खां के संयोजन में नातिया मुशायरे की महफिल सजी। दरगाह हुसैनिया मुजीबिया के सज्जादा नशीन शाह फसीह ने कहा कि दरगाहें अमन व सलामती की संदेशवाहक हैं। हजरत आरिफ अली शाह नेक दिल सूफी थे। उन्होंने इंसानियत को नेक राह पर चलना सिखाया।
उन्होंने पहुंचा दो पैगाम नबी का दुनिया के हर कोने में, सच्ची है बस बात नबी की बाकी सब दुनियादारी कलाम पेश किया। अख्तर अली ने दिलदार का चेहरा शह अबरार का चेहरा है, चांद से बेहतर मेरे सरकार का चेहरा है प्रस्तुति दी। हाफिज सहीमुद्दीन ने जो शेरे मोहम्मद की शान बयां करेगा, ताईद उसी शेर की कुरआन करेगा की नात सुनाई।
अरशद अमीन, फराज कानपुरी, नजर कैफ, तनवीर रजा, मोहम्मद शाकिर, काजी मुताहिर अली, सरताज मुजीबी और एजाज वारसी आदि ने कलाम पेश किए। इसके बाद लंगर का दौर चला। इस अवसर पर हाफिज शफीक अहमद, बिलाल शफीकी, मशकूर आजाद, यास्मीन खां, यामीन खां, शहबाज खां, अच्छे मास्टर, मोहसिन और शानू आदि मौजूद रहे।