फर्रुखाबाद। सपा नेता और कर्मचारी के पुत्र को बचाने के लिए विवेचक इंस्पेक्टर के अग्रिम विवेचना के प्रार्थनापत्र को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही प्रार्थनापत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक पक्ष कैसे फायरिंग कर सकता है।
फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के जयनारायण वर्मा रोड निवासी भोजपुर विधायक नाग्रेंद्र सिंह राठौर के दरवाजे पर 16 जून 2021 को दो पक्षों में पुरानी रंजिश में जवाबी फायरिंग हुई थी। गोली लगने से भाजपा नेता विमल कटियार की कार क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस मामले में कर्नलगंज चौकी इंचार्ज ज्ञानेश्वर सिंह ने लोको रोड निवासी सपा नेता चन्नू यादव के बेटे आर्यन यादव, मोहल्ला तलैया लेन निवासी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बल्लू शुक्ला के बेटे कौशिक शुक्ला, दूसरे पक्ष के आवास विकास कालोनी निवासी सोनू सोलंकी, सैनिक कालोनी निवासी वकील सुनील सिंह राठौर, दीपक व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ पुरानी रंजिश में फायरिंग कर दहशत फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने सुनील राठौर, सोनू सोलंकी, दीपक, शिशिर सक्सेना सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर 17 जून को जेल भेज दिया था। विवेचक ने 21 जनवरी को सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। एक जनप्रतिनिधि की पैरवी पर एसपी ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए।
इंस्पेक्टर कमलेश कुमार ने आर्यन व कौशिक की संलिप्तता पर प्रश्न चिह्न लगाकर कोर्ट से अग्रिम विवेचना की अनुमति मांगी। कोर्ट ने कहा कि दो पक्षों में फायरिंग हुई तो एक पक्ष के लोग कैैसे वहां नहीं हो सकते।
मुकदमा भी पुलिस ने दर्ज कराया और विवेचना भी पुलिस कर रही है। ऐसे में क्या एक ही पक्ष फायरिंग कर रहा था। कोर्ट के सवाल का विवेचक जवाब नहीं दे सके। कोर्ट ने अग्रिम विवेचना के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। ऐसे में सपा नेता व कर्मचारी के पुत्र को अब जमानत करानी होगी।