फर्रुखाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट घनश्याम शुक्ला की अदालत ने 10 वर्ष पुराने एक परिवाद में तत्कालीन चकबंदी लेखपाल रामसिंह पाल को रिश्वत मांगने एवं सरकारी अभिलेख गायब करने के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
थाना मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव रोहिला निवासी रामनाथ सिंह ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। इसमें कहा कि चकबंदी से संबंधित आदेशों के अमल दरामद के लिए लेखपाल ने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी। रकम न देने पर पत्रावली गायब कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में परिवादी और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषमुक्त करार दिया। साथ ही आरोपी की जमानत निरस्त करते हुए उनके जमानतगीरों को भी दायित्वों से मुक्त कर दिया।