वस्त्र धुलाई इकाइयों के रसायनिक पानी से अमेठी जदीद में हैंडपंपों का पानी
भी बिगड़ रहा है। इलाके में 18 से 20 के करीब वस्त्र धुलाई इकाइयां हैं।
इनका पानी कच्ची नालियों में बहता है। यह पानी रिसकर जमीन के भीतर पहुंच
रहा है। इससे भूगर्भ जल की सेहत को भी खतरा पैदा हो गया है। लोगों की मानें
तो इन क्षेत्रों में हैंडपंप से निकलने वाले पानी के स्वाद में बदलाव आ
रहा है।
अंगूरीबाग इलाके से वस्त्र छपाई इकाइयां अमेठी जदीद इलाकेे में
शिफ्ट हो गई हैं। यहां वस्त्रों की रंगाई के बाद धुलाई होती है। केमिकल
युक्त यह पानी नालियों से होकर गंगा में पहुंचता है। पानी की तादाद ज्यादा
होने से यह सड़कों के ऊपर से भी बहता है। कच्ची नालियों व गलियों की वजह से
पानी रिसकर जमीन में पहुंच जाता है। हैंडपंप व सबमर्सिबल चलाने पर
सामान्य
के साथ रसायनिक पानी बाहर आ जाता है। सबसे ज्यादा समस्या कच्ची नालियों के
पास लगे हैंडपंपों में है। इन हैंडपंपों का पानी कसैला होने लगा है। ग्राम
सभा की आबादी 6000 है। यहां 95 हैंडपंप लगे हुए हैं। प्रदूषित पानी के
सेवन से स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया है।
दो माह
पहले समस्या गंभीर हो चुकी है। तब इकाई संचालकों ने पानी का रुख मोहल्ला
अफरीदी के तालाब की ओर कर दिया था। इससे तालाब के पास के हैंडपंपों में
बदबूदार व रंगीन पानी आने लगा था। बाद में यह तालाब भरवा दिया गया। गांव के
शमशाद, सलीम बताते हैं कि रंगाई व धुलाई इकाइयां समस्या बनी हुई हैं। इससे
जमीन के भीतरी पानी पर भी संकट है।
इन रसायनों का होता प्रयोग
वस्त्रों
की रंगाई में सिंथेटिक रंगों का प्रयोग किया जाता है। इनमें सल्फर,
नेप्थॉल, नाइट्रेट, क्रोमियम, आर्सेनिक व सीसा आदि शामिल हैं। धुलाई के बाद
यही रसायन नाली के पानी में बहते हैं। ये पानी को जहरीला बना रहे हैं।
नहीं लगे ट्रीटमेंट प्लांट
इलाके
की वस्त्र रंगाई और धुलाई इकाइयों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगे हैं।
इससे रसायनिक पानी सीधे नालियों में जाता है। कई किसान इस पानी से फसलों की
सिंचाई भी करते हैं।
भैरों मंदिर जाने वाला रास्ता तालाब
इन
इकाइयों का पानी गंगा में जाता है। अमेठी जदीद गांव से भैरों मंदिर के लिए
खड़ंजा जाता है। पानी की बड़ी तादाद से कच्ची नालियां टूट गई हैं। यह पानी
खड़ंजे पर बह रहा है। इससे खड़ंजा तालाब सा बन गया है। इसी से होकर
श्रद्धालु भैरों मंदिर जाते हैं।
कई बार कहा, नतीजा सिफर
अमेठी
जदीद के प्रधान मुफीद खां कहते हैं कि अधिकारियों को कई बार समस्या बताई
गई। इकाई संचालकों को ग्राम पंचायत की ओर से नोटिस दिए गए। एक बार गांव के
लोगों के साथ तालाबंदी भी की। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। यह कहते हैं
कि रसायनिक पानी से लोगों के बीमार होने का खतरा बना हुआ है।