जिले में अन्ना पशुओं के लिए बनाए गए अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों के संचालकों के बैंक खाते खुलवाए जाएंगे। शासन से भेजी गई चारे की धनराशि खातों में हस्तांतरित की जाएगी। इसके साथ ही रजिस्टर पर आश्रय स्थलों में बंद गोवंश का विवरण दर्ज किया जाएगा।
अन्ना पशुओं को बंद करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें बंद गोवंश की देखरेख के लिए ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी व 8-10 संभ्रांत ग्रामीणों की कमेटी भी बनाई गई। चारे की व्यवस्था की भी जिम्मेदारी कमेटी की है। हाल ही में शासन से आश्रय स्थलों में बंद गोवंश के चारा-पानी के लिए एक करोड़ रुपये भेजे गए हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि सभी आश्रय स्थलों पर रजिस्टर बनवाकर उसमें रखे जा रहे गोवंश का विवरण दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। शासन से गाइड लाइन मिलने के बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी आश्रय स्थल के संचालकों को चारा-पानी के लिए धनराशि आवंटित करेगी। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर आश्रय स्थलों की कमेटी के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जा रहे हैं। जिसमें धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। इस खाते का संचालन ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी द्वारा किया जाएगा।
विजाधरपुर आश्रयस्थल का किया निरीक्षण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने मंगलवार को विजाधरपुर स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि 28 गोवंश पाए गए। गोवंश के विवरण के लिए रजिस्टर बनवा दिया गया है। हालांकि वहां चारा-पानी की व्यवस्था ठीक मिली।