आला हाकिम ने गोद लिया तो लगा वर्षों की मुराद पूरी हो जाएगी। दुख की घड़ी
में उनका साथ मिलेगा। अब तक मनमानी करने वालों पर लगाम लगेगी। अनुदान ही
क्यों, सरकार ही हर मेहरबानी दरवाजे पर खड़ी नजर आएगी, लेकिन यह क्या। एक
झटके में सारी उम्मीदें टूट गई। बारिश के बाद ओलावृष्टि ने खेत तबाह कर
दिया तो आला हाकिम ने भी मुंह
मोड़ लिया। मरहम लगाने को कौन कहें, एक बार
दर्द जानने की भी जहमत नहीं उठाई। जी, हां हम बात कर रहे हैं मुख्य विकास
अधिकारी द्वारा गोद लिए गए गांव ईमादपुर पमारान की। इन्होंने गांव को गोद
लेने की औपचारिकता तो निभा ली, लेकिन कराह रहे किसानों की दर्दभरी दांस्ता
सुनने की फुर्सत नहीं है। स्थिति यह है कि किसानों को अभी तक न तो सरकारी
मुआवजा मिला और न ही पिछले सीजन का बीमा क्लेम।
अमृतपुर तहसील मुख्यालय
से 8 किलोमीटर की दूर है गांव ईमादपुर पमारान। गांव विकास खंड राजेपुर में
आता है। सीडीओ एसएन शुक्ल ने ये गांव गोद लिया है। गांव की आबादी 1100 के
लगभग है। गांव के 98 फीसदी लोग खेती-किसानी करते हैं। ज्यादातर छोटे और
मंझोले किसान हैं। गांव के किसान सौदान सिंह , हरिनाथ का कहना है कि गेहूं
में 50 फीसदी नुकसान हुआ है। कोई सर्वे तक करने नहीं आया है। गांव के लोग
बताते हैं कि जनवरी में सीडीओ साहब आए
थे। सरकारी स्कूल तक आकर चले गए।
किसान जदुनाथ व रामनाथ कहते हैं कि फसल की तबाही के बाद सीडीओ साहब दर्द
जानने नहीं आए। यह कहते हैं कि न तो पीड़ित किसानों को फसल बीमा मिला और न
ही मुआवजा। किसान मदनपाल कहते हैं कि सीडीओ साहब हमदर्दी दिखाते तो आंसू
पुछ सकते थे। उन्होंने गांव गोद लेने के बाद मुश्किलों में मुंह फेर लिया।
दुर्योधन कहते हैं कि गांव के ही हालात कौन से ठीक हैं। महीनों सफाई
कर्मचारी नहीं आता है। जगह जगह गंदगी है।
केस: 1
योगेंद्र सिंह
के पास 20 बीघे खेत है। बेमौसम बरसात में करीब 50 फीसदी फसल तबाह हो गई।
आलू में मंदी से कुछ भी हाथ नहीं लगा। केसीसी से 1 लाख 40 हजार रुपया
निकाला। केसीसी का पैसा चुकाना तो दूर परिवार के गुजारा पर संकट है।
केस: 2
दल
सिंह यादव के पास पांच बीघे खेत है। गेहूं की फसल 50 फीसदी मारी गई। एक
लाख रुपये का केसीसी है। आलू में नुकसान हुआ। सूखा में धान भी मारा गया था।
इनका कहना है कि परिवार के गुजर-बसर पर संकट है।
केस: 3
मनोहर के
पास 6 बीघा खेती है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। क्रेडिट कार्ड से 25
हजार लोन लिया। गेहूं की फसल तबाह हो गई। आलू मंदी में चला गया। इनका कहना
है कि कर्ज लेकर आगे की जिंदगी बसर होगी।
जाएंगे गांव, दोबारा होगा सर्वे
सीडीओ
एसएन शुक्ल ने कहा कि ईमादपुर पमारान में फसल में नुकसानी का दोबारा सर्वे
करवाएंगे। वह गांव भी जाएंगे। किसानों का दर्द सुना जाएगा। सर्वे में
नुकसानी के दायरे में आने पर मुआवजा मिलेगा।