पत्ती लपेटक सूड़ी धान की फसल को चाट रही है। हरे रंग की सूड़ी धान की
पत्ती में खुद को लपेट लेती है। इसके अंदर रह कर पत्ती का हरा रंग
(क्लोरोफिल) चाटकर उसे सुखा देती है। गर्म मौसम में सूड़ी का प्रकोप तेजी
से बढ़ रहा है। किसानों की मानें तो अब तक 50 फीसदी फसल को नुकसान हो चुका
है। सामान्य दवाइयां सूड़ी पर बेअसर हैं। मौसम का मिजाज
यूं ही गर्म रहा तो
आगे हेलीकोवर्पा और पायरिल्ला का अटैक भी धान की फसल पर हो सकता है। पत्ती
लपेटक का हमला राजेपुर इलाके में ही है। बाकी हिस्सों में ऐसी शिकायत नहीं
है। राजेपुर इलाके में 800 हेक्टेयर धान की फसल खतरे में है। गंगा और
रामगंगा के बीच के इस इलाके में बालू की तपन से पत्ती लपेटक को पनपने का
मुफीद मौका मिल गया है। हरे
रंग की इस सूड़ी ने धान पर हमला बोल रखा है। यह
तेजी से फैल रही है। पत्ती लपेटक सूड़ी हरी पत्तियों का रंग चूस कर पौधों
का सुखा रही है। एक सप्ताह में सूड़ी 50 फीसदी फसल का नुकसान कर चुकी है।
सूड़ी पर क्लोरोपायरीफास, साइफर मिथायलीन और अमीडा दवाइयां बेअसर हो चुकी
हैं।
ताजपुर के किसान नेत्रपाल सिंह, भूढनपुर के किसान रघुपाल सिंह,
हमीरपुर सोमवंशी के सत्यपाल सिंह, अजय पाल और तुसौर के महेश सिंह ने बताया
कि पत्ती लपेटक सूड़ी फसल को तबाह कर रही है। आलू में नुकसान हो ही चुका
है। धान से उम्मीदें थीं। अब यह भी टूटने लगी हैं। राजेपुर इलाके के कृषि
महकमे केे प्रभारी रामनंदन लाल ने बताया कि इस समय धान बाली पर है। सूड़ी
पौधे को सुखा रही है। अब तक के आंकलन से उत्पादन में 50 फीसदी गिरावट की
आशंका है।
कृषि भवन में आपात बैठक
पत्ती लपेटक धान की
फसल के लिए बड़ी समस्या है। दवाइयों का कोई असर न होने से कृषि महकमे के
अफसर भी चिंतित हैं। सोमवार को इलाकाई किसानों ने उप निदेशक कृषि एके सिंह
को समस्या बताई। यह पौधे साथ लाए थे। इस पर डीडी कृषि ने जिला कृषि
अधिकारी एके सचान, कृषि वैज्ञानिक जगदीश सिंह और राजेपुर प्रभारी रामनंदन
को तलब कर
लिया। कृषि वैज्ञानिक जगदीश सिंह ने बताया कि पत्ती लपेटक गर्म
मौसम में तेजी से बढ़ती है। उन्होंने आशंका जताई कि मौसम की गर्माहट यूं ही
बरकरार रही तो हेलीकोवर्पा और पायरिल्ला कीट भी धान की फसल पर अटैक कर
सकता है। इससे बाकी फसल को बचाना भी मुश्किल हो सकता है।
पत्ती लपेटक सूड़ी से ऐसे बचा सकते फसल
- धान की पत्तियों की स्प्रे से धुलाई करें।
- खेत में नमी खत्म न होने दें।
- कारपेट हाइड्रोक्लोराइड(दानेदार) का छिड़काव करें। एक हेक्टेयर में 18 से 20 किलोग्राम का छिड़काव करें।
- किसान कारपेट हाइड्रोक्लोराइड (पाउडर ) को पानी में घोलकर भी फसल में छिड़काव कर सकते हैं।
- दवाई केे छिड़काव के बाद 24 घंटे के अंदर फसल में सिंचाई जरूर करें।