फर्रुखाबाद। मौसम में गर्मी बढ़ने के साथ आम की फसल में रोग व भुनगा की आशंका बढ़ गई। कृषि वैज्ञानिक ने बागवानों को दवा का छिड़काव करने की सलाह दी। इससे पेड़ सुरक्षित रहने के साथ फसल भी रोग रहित रहे।
कृषि विज्ञान केंद्र लकूला के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताया कि आम के बगीचे में भुनगा का प्रकोप हो तो थायोमेथाक्जाम 25 डब्लूजी 10 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए छह इंच की गहराई तक जुताई कराएं। मिज कीट मुलायम पत्तियों, प्ररोह, बौर व नन्हे फलों को भी क्षति पहुंचाता है।
इसके लिए क्विनालफास 25 ईसी के 2 मिली या इमीडाक्लोप्रिड के 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। खर्रा रोग से बचाव के लिए सल्फर 2 ग्राम या हेक्साकोनाज़ोल 5 एसएल की 1 मिली मात्रा प्रति ली पानी में छिड़काव कर सकते हैं। फलों की अच्छी वृद्धि के लिए 10 से 12 दिन में सिंचाई जरूर करें।
छोटे फलों को गिरने से रोकने के लिए प्लानोंफिक्स 1 मिली दवा/ 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। बाग के पास ईंट के भट्ठा या मिट्टी बलुई होने से फल का निचला हिस्सा काला पड़ जाता है। इसके लिए बोरेक्स छह ग्राम / लीटर पानी में घोलकर छिड़काव अप्रैल माह के अंत में करें। फल तोड़ने से तीन सप्ताह पहले थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्ल्यूपी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। सुबह या शाम को ही 8-10 सेमी डंठल सहित फल तोड़ें और भंडारण से पहले फल धो लेना चाहिए।
एक समान फल पकाने के लिए इथरेल दवा 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर 5-7 मिनट फल डुबाकर भंडारण करना चाहिए। कार्बाइड से फल नहीं पकाना चाहिए। उन्होंने बताया कि फल, सब्जी व अन्य पुष्पीय पौधों में पर परागण को बढ़ावा देने के लिए किसान मधुमक्खी पालन करें।