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आरक्षण से कई ग्राम पंचायतों में दलीय समीकरण बदलने की अटकलें

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आरक्षण से कई ग्राम पंचायतों में दलीय समीकरण बदलने की अटकलें लगाई जा रहीं हैं। लगातार दो व तीन बार चुनाव जीत चुके विभिन्न दलों के समर्थकों की ग्राम पंचायत आरक्षित हो जाने से उनमें मायूसी है। कई दिनों से ब्लाक कार्यालय के चक्कर लगा रहे कुछ निवर्तमान प्रधान चुनाव मैदान से बाहर होने की नौबत देख बुधवार को कार्यालय परिसर में नहीं दिखे।
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118 ग्राम पंचायत वाले जिले के सबसे बड़े विकास खंड में प्रधान पद का आरक्षण प्रस्तावित होते ही ब्लाक कार्यालय से लेकर गांव तक चर्चाओं व अटकलों का दौर चल निकला है। दलीय समीकरण के लिहाज से भी समीकरण बदलने का हिसाब लगाया जा रहा है।
मुस्लिम बहुल महमदपुर अचला, सरफुद्दीनपुर, निनौरा श्रंखलापुर जहां अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हुई हैं। वहीं सपा के पूर्व विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी व ब्लाक प्रमुख राशिद जमाल सिद्दीकी के पैतृक गांव जरारी ओबीसी के लिए आरक्षित हुई है। मुस्लिम बहुल ग्राम पंचायतें ईशापुर, भड़ौसा, राजेपुर सरायमेदा, नगला दाऊद, गंगाइच, नगला भीखा भी ओबीसी के लिए प्रस्तावित हुई हैं।
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लोधी बहुल कुंदन गनेशपुर से निवर्तमान प्रधान लगातार तीन बार से जीत रहे हैं। इस बार यह एससी के लिए प्रस्तावित हुई है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष फतेहचंद्र राजपूत के गांव की ग्राम पंचायत नगरिया देवधरापुर, रूनी चुरसई, श्रंगीरामपुर, मधवापुर के साथ ही कुम्हौली, ऊगरपुर सुलतानपट्टी, बझेरा मालिकपट्टी, पैगूपुर, हब्बापुर, लक्षमन नगला भी अनुसूचित जाति वर्ग के कोटे में चली गईं।
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष महोई ग्राम पंचायत से लगातार दो बार निर्वाचित हुए। अब यह ओबीसी वर्ग में रखी गई है। कमालगंज ब्लाक कार्यालय में बुधवार को आरक्षण सूची चस्पा की गई। इसके चलते वहां लोग सूची देखते नजर आए।
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