पुलिस हेलीपैड पर सपा मुखिया मुलायम सिंह की मौजूदगी में सपाइयों एवं
पुलिसकर्मियों में हुई मारपीट का मामला गरमा गया है। पार्टी हाइकमान ने
जिलाध्यक्ष को लखनऊ तलब किया है। वह गुरुवार को ही लखनऊ के लिए रवाना हो गए
हैं। शनिवार को जिलाध्यक्ष व सीएम का आमना-सामना होगा। साथ ही पीडब्ल्यूडी
मंत्री शिवपाल सिंह यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेतओं को भी जवाब देना होगा।
सपा
मुखिया मुलायम सिंह यादव बुधवार को श्रम संविदा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन
सतीश दीक्षित के बेटे के तिलक समारोह में शामिल होने आए थे। पुलिस लाइन
हेलीपैड के लिए मुलायम की फ्लीट गुजरने के बाद पुलिसकर्मियाें और सपाइयों
में मारपीट हुई। देर शाम सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने पूरे प्रकरण से
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अवगत कराया। पार्टी
सूत्रों की मानें तो सपा मुखिया ने सपाइयों के इस रवैये पर आक्रोश जताया
है। सपा मुखिया के
कड़क होते ही यह मामला गरमा गया है। पार्टी सूत्रों के
मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह यादव को तलब
किया। वहीं पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अन्य नेताओं के साथ ही
अफसरों से भी पूरे वाकए की जानकारी ली। वीडियो फुटेज भी जुटाए जा रहे हैं।
जिस तरह से पार्टी हाईकमान इस मामले में गंभीरता दिखा रहा है, उससे
जिलाध्यक्ष सहित पार्टी के कई नेताओँ पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
फिलहाल जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह गुरुवार को लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं।
जिला अध्यक्ष एवं बाकी नेताआें की शनिवार को सुबह मुख्यमंत्री से मुलाकात
होगी। मीडिया प्रभारी मंदीप यादव ने बताया कि शनिवार को जिलाध्यक्ष की
मुलाकात मुख्यमंत्री से होगी। इस वजह से शनिवार सुबह 11 बजे से पार्टी
कार्यालय पर होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई है।
एफआईआर में कलाकारी, नेताओं के नाम गायब
जहानगंज एसओ के साथ मारपीट और गालीगलौज करने के मामले में शासन के निर्देश
पर शुक्रवार को रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। रिपोर्ट लिखने की मजबूरी इसलिए
साफ हो जाती है कि इसमें किसी भी सपा नेता का नाम शामिल नहीं किया गया है।
मौके पर मौजूद सपाइयों के चेहरे से पुलिस वाले भी वाकिफ थे और अधिकारी भी।
एफआईआर में पुलिस पर सियासी खौफ
साफ है। एसओ जहानगंज शैलेंद्र मिश्रा की
तहरीर पर अज्ञात सपाइयों के खिलाफ मारपीट, गलीगलौज और सरकारी कार्य में
बाधा डालने की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। एफआईआर में किसी नेता का नाम शामिल न
होने के पीछे सियासी निहितार्थ बताए जा रहे हैं।