फर्रुखाबाद। सपा के दो धुर विरोधी नेताओं के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रहा विरोध चरम पर है। जिलाध्यक्ष नदीम फारूकी ने दिल्ली और लखनऊ के नेताओं को पूर्व राज्यमंत्री नरेंद्र सिंह यादव के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों का पुलिंदा सौंपा। इसके बाद ही लखनऊ और दिल्ली में गहन मंत्रणा शुरू हो गई है। स्थानीय संगठन के अधिकांश नेता पूर्व राज्यमंत्री को हर हाल में पार्टी से निष्कासित कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
पूर्व राज्यमंत्री की सपा के पुराने और कद्दावर नेताओं में गिनती है। उनके सीधे संबंध सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव से हैं। यही कारण है कि कुछ नेताओं की वह आंख की किरकिरी बने हुए थे। वर्ष 2007 में जब नदीम अहमद फारूकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया, तब नरेंद्र सिंह ने विरोध किया था। इसके बाद कई चुनावों में भी नरेंद्र सिंह ने नदीम अहमद का विरोध करने में कसर नहीं छोड़ी।
अब नदीम अहमद को पूर्व राज्यमंत्री से पुराना हिसाब चुकता करने का अच्छा मौका मिला है। इसी के तहत उन्होंने सपा प्रत्याशी डॉ. सुबोध यादव के पक्ष में खुलकर काम किया। पूर्व राज्यमंत्री की बेटी मोनिका यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए जब निर्दलीय ताल ठोंक दी, तो जिलाध्यक्ष ने रणनीति के तहत पार्टी नेताओं की दो टीमें बनाईं। बुधवार को एक टीम दिल्ली में प्रो. रामगोपाल यादव के पास और दूसरी टीम लखनऊ में अखिलेश यादव से मिली। दोनों ही टीमों ने पूर्व राज्यमंत्री व उनके पुत्र सचिन यादव के खिलाफ तमाम सबूत एकत्रित करके बड़े नेताओं को सौंपे। उनमें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होना दर्शाया गया है। अब पूर्व राज्यमंत्री के विरोधी गुट को उनके निष्कासन का इंतजार है।
सपा के एक जिम्मेदार नेता की मानें तो दिल्ली में प्रो. रामगोपाल यादव से मिलने जो टीम गई थी, उसमें उनके रिश्तेदार भी शामिल थे। चूंकि सुबोध यादव को टिकट दिलाने में प्रो. रामगोपाल की अहम भूमिका रही। इसलिए अब पूर्व राज्यमंत्री का निष्कासन भी उन्हीं के स्तर से होना तय बताया जा रहा है।
कभी 20, तो कभी 19 सदस्यों का दावा करने डा. सुबोेध के लिए अब जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट आसान नहीं होगी। मोनिका यादव को भाजपा के समर्थन के बाद सपा नेताओं में मायूसी है।
कमालगंज के ताहिर हुसैन सिद्दीकी बसपा से विधायक बने थे। उन्होंने अपने भाई तहसीन सिद्दीकी को जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए प्रत्याशी बनाया। उस वक्त पूर्व राज्यमंत्री की वजह से ही तहसीन अध्यक्ष बन सके थे। इसके चलते अब सबकी निगाहें ताहिर हुसैन पर लगी हैं। हालांकि सपा में चर्चा है कि ताहिर हुसैन अलीगंज में डॉ. सुबोध के घर मंगलवार को कई घंटे बैठे रहे।
‘मोनिका मेरी पढ़ी-लिखी बेटी है। उसे अपना भविष्य तय करने का अधिकार है। तमाम नेताओं के बच्चे अलग-अलग पार्टी में हैं। जिन्हें जहां अच्छा लगता है, वह वहां है। उन्हें तो जनता प्यार करती है। कुछ नेताओं को यह रास नहीं आ रहा। मेरा विरोध करने वाले नेता अपने गिरेबान में झांकें। मैं तो सपा का सच्चा सिपाही हूं।’
- नरेंद्र सिंह यादव, पूर्व राज्यमंत्री।
‘जब तक पार्टी का प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ था, तब तक हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार था। पार्टी का जो निर्देश होगा, उसी का पालन करेंगे। अब तो सपा के प्रत्याशी के साथ ही हूं।’
- ताहिर हुसैन सिद्दीकी, पूर्व विधायक कमालगंज।