फर्रुखाबाद। गैर इरादतन हत्या में गवाह व साक्ष्य के आधार पर एडीजे प्रथम विष्णु चंद्र वैश्य ने एक दोषी को छह वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। न देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगने के आदेश दिए।
जनपद शाहजहांपुर थाना मिर्जापुर गांव धियरपुरा निवासी रनवीर ने 7 मई 1997 को शमसाबाद थाने में गांव के जौहरी, रामनरेश व गांव रोशनाबाद निवासी शंकर, लालाराम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। इसमें आरोप लगाया कि छह मई 1997 को भाई ओमकार, ओमपाल, हाकिम के साथ ढाईघाट गंगा जी पर पूजा करने आए थे।
पूजा करने के बाद भाई हाकिम शमसाबाद थाने के गांव रोशनाबाद निवासी मौसिया ससुर विश्राम के घर जाने की बात कहकर चला गया। जौहरी, रामनरेश, शंकर, लालाराम भाई हाकिम को रोशनाबाद में लगे मेला दिखाने के लिए भाई हाकिम को साथ ले गए। 7 मई 1997 को रोशनाबाद निवासी सुरेंद्र दुबे के खेत के पास गड्ढे में हाकिम का शव मिला। इन लोगों ने उसकी हत्या कर शव फेंक दिया था।
विवेचक ने चारों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जौहरी व रामनरेश की मौत हो गई। 21 मार्च को न्यायाधीश ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर आरोपी शंकर को दोषी करार किया था।
गुरुवार को न्यायाधीश ने दोषी शंकर को छह वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोषी को 20 हजार रुपये बतौर अर्थदंड जमा करने के आदेश दिए। अर्थदंड नहीं देने पर उसको छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से अनिल बाजपेई, दीपिका कटियार ने दलीलें दीं।