फोटो-18, कमालगंज क्षेत्र के एक शीतगृह में निकासी के बाद सुखाने व छटाने के लिए फैला आलू। संवाद
कमालगंज। शीतगृहों में आलू की निकासी इस समय चरम पर है। नई फसल के लिए गड़ाई करने के लिए किसान शीतगृहों में भाड़ा जमा कर निकासी के लिए पर्ची जमा कर रहे हैं।
कई शीतगृहों में पांच से छह हजार पैकेट की पर्ची जमा हो जा रही, लेकिन निकासी तीन हजार पैकेट के करीब ही हो पा रही। ऐसे में किसान परेशान हैं।
खेतों में नई फसल तैयार करने को गड़ाई के लिए किसान आलू भंडारण वाले शीतगृह में भाड़ा (किराया) जमा कर रहे हैं। अमूमन शीतगृह में आलू निकालने के लिए जितनी पर्ची जमा हो रही। उससे आधा आलू ही पल्लेदार निकाल पा रहे हैं। इससे निकासी पिछड़ रही।
शीतगृह संचालक इस समय व्यापारियों के बजाय किसानों के आलू की निकासी पर जोर दे रहे हैं। अगेती फसल के लिए छोटे साइज के सजे आलू गुल्ला की गड़ाई अब बंद हो रही। अब बड़े साइज के छट्ठा आलू को एक साइज के टुकड़ों में काटकर कतरिया की गड़ाई चालू है।
शीतगृहों में निकासी का दबाव बढ़ने से आलू पैकेट बादर निकालने वाले पल्लेदारों की कमी पड़ गई है। पल्लेदारों ने प्रति पैकेट रेट भी बढ़ा दिए। किसानों व व्यापरियों में अपनी साख बनाए रखने के लिए शीतगृह मालिक पर्याप्त पल्लेदारों की जुगाड़ कर रहे।