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दो महीने में छह हजार मीट्रिक टन ही हुई गेहूं खरीद

Mon, 13 Jun 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /फर्रुखाबाद
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कमालगंज मंडी समिति में गेहूं क्रय केंद्र पर रखा मक्का। - फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद। सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर गेहूं की खरीद कम होने से गरीबों की थाली से रोटी गायब हो सकती है। 50 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष छह हजार मीट्रिक टन ही गेहूं खरीद हो सकी है। गेहूं न आने से केंद्र प्रभारियों ने केंद्र बंद कर दिया और रिपोर्ट डिप्टी आरएमओ के दे दी है।  लक्ष्य का केवल 11 फीसदी ही गेहूं खाद्य एवं रसद विभाग की गोदाम में पहुंचने से गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाएं खटाई में पड़ सकती हैं।
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वर्ष 2015-16 में जिले में गेहूं खरीद के लिए कई विभागों की ओर से 65 क्रय केंद्र खोले गए। इन केंद्रों को 1 अप्रैल से 15 जून तक 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य सौंपा गया। 13 जून 2016 तक यह केंद्र केवल छह हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद सके। केंद्रों पर गेहूं न पहुंचने पर केंद्र प्रभारी दो दिन पहले ही अपने-अपने केंद्र बंद करके भाग गए और उन्होंने गेहूं खरीद की रिपोर्ट डिप्टी आरएमओ और गेहूं खाद्य एवं रसद विभाग की गोदाम में भेज दिया।

गेहूं क्रय का लक्ष्य केवल 11 फीसदी हासिल होने से खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई हैं। एसएमआई राजेपुर एसके वर्मा का कहना है कि कई विभाग अपने क्रय केंद्र खोलकर गेहूं क्रय करके खाद्य एवं रसद विभाग की गोदाम में जमा कर देते हैं और उसी विभाग से गरीबों के लिए चलाई जा रही अंत्योदय योजना, छात्र-छात्राओं के लिए चलाए जा रहे मिड डे मील और गरीबों को मिलने वाले सस्ती कीमत पर गेहूं की आपूर्ति विकास खंडों पर बने गोदामों में की जाती है।
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उनका मानना है कि जब खाद्य एवं रसद विभाग की गोदाम में गेहूं नहीं होगा तो फिर वह विकास खंड स्तर पर बनाए गए गोदामों को गेहूं कहां से देंगे। गेहूं कम खरीद से जो स्थिति उत्पन्न हुई है। उससे कई योजनाएं खटाई में पड़ सकती हैं और गरीबों की थाली से रोटी गायब हो सकती है। डिप्टी आरएमओ अनुराग पांडेय ने बताया कि जिस समय गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उस समय गेहूं की फसल अच्छी थी।

मौसम की मार की वजह से 30 फीसदी गेहूं का उत्पादन कम हो गया। नतीजतन गेहूं की खरीद केवल छह हजार मीट्रिक टन ही हो सकी। डिप्टी आरएमओ का कहना है कि यह स्थिति केवल फर्रुखाबाद में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में है। कहीं भी गेहूं का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका है। एडीएम/प्रभारी गेहूं खरीद मनोज सिंघल ने बताया कि गेहूं किसानों के पास बचा ही नहीं है। गांव-गांव जाकर गेहूं खरीद की गई। किसानों ने मार्केट में अपना गेहूं बेच दिया, जिसकी खास वजह यह रही कि खुले बाजार में गेहूं की कीमत अधिक रही और क्रय केंद्रों पर कम रही। मंडल भर में गेहूं क्रय केंद्रों का यही हाल रहा है। अन्य प्रदेशों में गेहूं की खरीद अच्छी हुई है।
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