फर्रुखाबाद। दुष्कर्म पीड़ित एक किशोर की ओर से दर्ज पॉक्सो के मामले में पीड़ित का डॉक्टरी परीक्षण करने में लापरवाही के मामले में लोहिया अस्पताल के सीएमएस, सर्जन समेत छह डॉक्टर पेश हुए। दफ्तर में सभी डॉक्टरों के लिखित बयान किए गए। विशेष न्यायाधीश ने लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और सीएमएस की फटकार लगाई। डॉक्टर न होने से ओपीडी में काम भी प्रभावित रहा।
कादरीगेट थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोर ने फतेहगढ़ कोतवाली में दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी लिखाई थी। फतेहगढ़ पुलिस किशोर को लोहिया अस्पताल लेकर पहुंची। पहले दिन किशोर का परीक्षण नहीं किया गया। दूसरे दिन जब फिर पुलिस किशोर को अस्पताल ले गई। तब डॉ. देवश्य राजपूत ने परीक्षण तो किया, मगर कुकर्म का सच जानने के लिए प्रेक्टोस्कोपी जांच नहीं लिखी। पुलिस तीसरी बार लेकर आई, तब उसकी जांच लिखकर सर्जन डॉ. रोहित तिवारी को ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद न तो सर्जन ने सक्रियता दिखाई और न ही लैब में उसका नमूना लिया गया। फतेहगढ़ पुलिस ने पूरा मामला अपर सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट रितिका त्यागी की अदालत में अवगत कराया। न्यायाधीश ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित सभी डॉक्टरों को बृहस्पतिवार सुबह 10.30 बजे तलब कर लिया।
सुबह आठ बजे से ही दफ्तर में संबंधित डॉक्टरों के बयान तैयार कराए गए। इसके बाद सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा, सर्जन डॉ. रोहित तिवारी, पैथोलॉजिस्ट डॉ. जय सिंह व डॉ. शिल्पी पाराशर, ईएमओ डॉ. अभय श्रीवास्तव व डॉ. देवश्य राजपूत कोर्ट में पेश हुए। न्यायाधीश ने सभी डॉक्टरों से सवाल जवाब किए। वहां जमकर फटकार लगाई गई। दोपहर 12 बजे के बाद डॉक्टर और सीएमएस अस्पताल में वापस आ सके। इससे ओपीडी का काम भी खासा प्रभावित रहा। मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि पहले पुलिस अधूरे कागज लेकर अस्पताल आई। इसके बाद कुछ स्तर पर ईएमओ की लापरवाही भी रही। न्यायाधीश को लिखित जवाब दाखिल कर दिए गए हैं। आगे से व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।