खेतों में रासायनिक खादों के अधिक उपयोग से माटी बीमार हो रही है। मिट्टी के बीमार होने के कारण किसानों को बेहतर उपज नहीं मिल पा रही है।
शुक्रवार को मेला रामनगरिया में जिला औद्यानिक मिशन के तहत किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद़घाटन एडीएम मनोज सिंघल ने दीप जलाकर किया। किसानों को आलू की विभिन्न प्रजातियों के उत्पादन की नई जानकारी से अवगत कराया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डा. प्रणवीर सिंह ने कहा कि आर्गेनिक कार्बन की कमी से खेत की माटी बीमार हो रही है।
उन्होंने कहा कि मिट्टी में0 .8 प्रतिशत आर्गेनिक कार्बन होना चाहिए। अंधाधुंध रासायनिक खादों के इस्तेमाल से यह घटकर 0.2 प्रतिशत से भी कम रह गया है। उन्होंने रासायनिक खादों के बढ़ते प्रयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में लगातार फसलों को उगा रहे हैं लेकिन उसकी उर्वरक क्षमता को बढ़ाने का काम नहीं कर रहे हैं। प्रभारी अधिकारी ने खेतों में जैविक उर्वरकों के प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जायद की फसल कटने के बाद खेत खाली हो जाते हैं। किसान इसके बाद मूंग, उड़द और मूंगफली की फसल कर सकते हैं। इन फसलों से मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम नहीं होती है। उपज भी अच्छी मिल जाती है।
डा. प्रणवीर सिंह ने कहा कि फसल उत्पादन में यूरिया के प्रयोग का कोई मतलब नहीं होता है। यूरिया खाद पौधे को बढ़ा तो देती है लेकिन पोषण जैविक खादों से ही मिलता है। मुख्य पशु चिकत्साधिकारी डा. पुष्पकुमार ने मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना और मुर्गी पालन की जानकारी दी। एडीएम मनोज सिंघल ने औद्यानिक मिशन के तहत अनुदानित ट्रैक्टर की चाबी किसान दीपनरायन को दी।
एडीएम ने आलू, प्याज, लहसुन, मिर्च, अमरूद आदि का अच्छा उत्पादन करने वाले किसानों को प्रशस्ति पत्र व शाल ओेढ़ाकर सम्मानित किया। मेले की अध्यक्षता पूर्व विधायक महरम सिंह ने की। इस मौके पर उप कृषि निदेशक प्रसाद एके सिंह, आलू शाक भाजी अधिकारी नेपालराम, डा. अनुज भटनागर, डा. बीके गुप्ता आदि मौजूद रहे।