मेला रामनगरिया में अलग अलग अखाड़ों और क्षेत्रों से वसंत पंचमी को शोभायात्राएं निकाली गईं। संतोें और यात्रा में शामिल युवाओं ने यात्राओं में तरह तरह के करतब दिखाकर सभी का मन मोहा।
मेला रामनगरिया के वैदिक क्षेत्र से शुक्रवार सुबह शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में शामिल साधु संताें ने हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों को आकर्षित किया। यात्रा में तलवारबाजी, माउथ फायर, लाठी, धनुष विद्या और फायर रिंग का प्रदर्शन किया गया। आग के गोले के बीच से कूद रहे युवाओं को देखनेे के लिए खासी संख्या में लोग जमा रहे। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु ओम लिखी टोपी पहने हुए थे।
आर्यवीर दल के संयोजक स्वामी महेश योगी ने आर्य वीरों का उत्साहवर्धन किया। संचालक आचार्य योगेश शास्त्री ने बताया कि बढ़ते आतंकवाद के चलते आत्म सुरक्षा के लिए आर्यवीर दलों का गठन किया गया है। यात्रा में मुन्ना यादव, प्रमोद यादव, शिवस्वरूप ब्रह्मचारी, प्रदीप शास्त्री, प्रदीप कुमार, सरोज शास्त्री, दलवीर शास्त्री, डा. शिवराम सिंह, जितेंद्र आर्य, जयदेव, सहदेव सरस, विनोद आर्य, अनुराग, हरिओम, शास्त्री, रेनू आर्य, अशोक आर्य आदि मौजूद रहे। वहीं 500 कुंडीय महायज्ञ के शुभारंभ पर मेला क्षेत्र में शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यज्ञाचार्य पंडित कृष्णानंद सेमवाल के नेतृत्व में यात्रा यज्ञशाला से होते हुए गंगातट पर पहुंची।
यहां से मेला क्षेत्र की तीसरी सीढ़ी से होते हुए यज्ञशाला पर यात्रा का समापन हुआ। यात्रा के मुख्य यजमान राममोहन भल्ला और बृजेश दुबे रहे। मेले के आदर्श क्षेत्र से भी शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा तीसरी सीढ़ी क्षेत्र से प्रारंभ होकर मेले के बाजार से होते हुए प्रशासनिक क्षेत्र में पहुंची। यहां शोभायात्रा में शामिल संतोें का मेला व्यवस्थापक संदीप दीक्षित ने माला पहनाकर स्वागत किया। यात्रा मेला क्षेत्र की परिक्रमा करते हुए आश्रम पर समाप्त हुई। यात्रा समापन पर प्रसाद वितरित किया गया।
शोभायात्रा में स्वामी सत्यस्वरूप ब्रह्मचारी, जगपाल सिंह, महंत सोमवार पुरी, शिवस्वरूप ब्रह्मचारी, सत्यार्थी , रामप्रकाश आश्रम, अयोध्या दास, सुबोधा आश्रम, ब्रह्म चैतन्य गिरि, राम जानकी, मुन्नी, रेहाना, सुशीला, उर्मिला, कांती, गीता, शकुंतला, रामजानकी आदि मौजूद रहीं। विष्णु महायज्ञ के लिए छठी सीढ़ी स्थित छाता वाले क्षेत्र से जल यात्रा निकाली गई। यात्रा में शिवस्वरूप, मंगल स्वरुप, रामशरण दास, सेवा दास, रामचंद्र दास, राजू, कविता, रवि, नेहा, पूर्णिमा, उनंतराम, गोपालदास, रामदास आदि मौजूद रहे।