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नवाबगंज की बबना झील में चलने लगे फावडे,

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नवाबगंज (फर्रुखाबाद)। बबना झील की खुदाई के लिए रविवार से फावड़े चलने लगे। पहले दिन 217 मजदूरों ने काम किया। 26 हेक्टेयर की खुदाई कर दो करोड़ से झील का सुंदरीकरण कराया जाएगा। झील को पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है।
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सीडीओ एम.अरून्मोलीने पीडी राजमणि वर्मा, डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक और बीडीओ कौशल कुमार गुप्ता ने पूजन के बाद फावड़ा चलाकर खुदाई कार्य का शुभारंभ किया। सीडीओ ने बताया कि बबना में 26 हेक्टेयर भूमि पर झील का निर्माण कराया जाएगा। इसमें 10 भूखंड शामिल हैं। 6.12 हेक्टेयर के एक भूखंड की खुदाई के लिए 32 लाख रुपये का एस्टीमेट बना है।
सीडीओ ने जैसे जैसे काम होता जाएगा वैसे-वैसे अन्य भूखंडों के एस्टीमेट बनाए जाएंगे। झील को पर्यटन के लिए विकसित करने से ब्लॉक व ग्राम पंचायत के साथ ग्रामीणों की भी आय बढ़ेगी। झील जिले की बड़ी उपलब्धि होगी। सड़कों और बिजली व्यवस्था को भी सही कराया जाएगा।
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झील के आसपास छाया दार, फूलदार, फलदार पौधे लगाए लगाए जाएंगे।
गढ़िया के ग्रामीणों ने सीडीओ से बिजली न होने की शिकायत की। उन्होंने समस्या के जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया। एडीओ मयंक गौड़, प्रधान सीता देवी, प्रधान पति संजीव यादव, सचिव कुलदीप सिंह, प्रशांत, जेई रजनीश कुमार आदि मौजूद रहे।
पिलखना की झील पर ग्रामीणों का कब्जा
नवाबगंज। ग्राम पंचायत पिलखना में 989 बीघा में बनाई गई झील 20 वर्ष पहले आकर्षण का केंद्र थी। यहां विदेशी पक्षियों की चहाचहाहट की गूंज रहती थी। दूर-दूर से लोग पक्षियों को देेखने आते थे। झील में पानी भी हर मौसम में उपलब्ध रहता था। धीरे-धीरे झील पर ग्रामीणों ने कब्जा शुरू किया।
अब हालात यह हैं कि 50 प्रतिशत झील पर कब्जा हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया की झील में प्रवास के लिए तिब्बत, मंगोलिया, साइबेरिया व पहाड़ी क्षेत्र के पक्षियों का आना अब बंद हो गया है। करीब 15-20 वर्ष से प्रवासी पक्षी नहीं आ रहे हैं। अक्तूबर से मार्च तक विदेशी पक्षियों का बसेरा रहता था।
ग्राम प्रधान सुनील कुमार ने बताया कि झील की जमीन उमरैल, ब्राहिमपुर, पिलखना, भटा गांव तक है। झील में मछली पालन के पट्टे किए गए थे। झील को पाटकर पट्टेधारक खेती कर रहे हैं। बीडीओ कौशल कुमार गुप्ता ने कहा कि कब्जे का मामला राजस्व विभाग का है। लेखपाल यदि पैमाइश करते हैं तो झील का मनरेगा से सुंदरीकरण कराया जाएगा।
ग्रामीण बोले
गांव ब्रह्मपुरी निवासी लाखन सिंह ने बताया कि झील में लोगों ने कब्जा कर रखा है। इससे झील विलुप्त होती जा रही है।
पिलखना निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया यह झील 989 बीघा में बनी हुई है। 15 वर्ष पहले झील पर विदेशी पक्षी आते थे। अक्तूबर से पक्षियों का आना शुरू हो जाता था। सत्यराम ने बताया उनके नाम 12 बीघा पट्टा किया गया था। यह भूमि अब दूसरे लोग जोत रहे हैं।
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