जिले में यूरिया खाद का संकट गहराता जा रहा है। अधिकतर सरकारी खाद केंद्रों पर यूरिया खत्म हो चुकी है। गेहूं की फसल में आवश्यक रूप से छिड़काव के लिए किसान ब्लैक में यूरिया खाद खरीदने को मजबूर है। अमर उजाला ने सभी ब्लाकों से पड़ताल कराई तो यूरिया खाद की किल्लत की समस्या सामने आई।
सहकारी समितियों पर खाद निल
मोहम्मदाबाद। किसान सेवा सहकारी समिति मोहम्मदाबाद और साधन सहकारी समिति हरकमपुर में यूरिया खाद का स्टॉक न के बराबर है। किसान मजबूरी में यूरिया खाद ब्लैक में खरीदने को मजबूर हैं। साधन सहकारी समिति हरकमपुर में करीब दो दिन पहले 300 बोरी यूरिया आई थी। अब मात्र 25 बोरी बची है। इसी तरह किसान सेवा सहकारी समिति मोहम्मदाबाद में 500 बोरी यूरिया आई थी और 50 बोरी बची हैं।
मोहम्मदाबाद के सचिव अवध कुमार यादव और हरकमपुर के सचिव ब्रजभान सिंह ने बताया कि डिमांड भेजी गई है। वहीं ज्यौंता समिति में भी यूरिया का स्टाक निल है। सचिव ब्रजभान सिंह यादव ने बताया कि डिमांड बजट पास न होने से खाद नहीं आई है। बाजार में 380 रुपये प्रति बोरी नागार्जुन यूरिया और 410 रुपये में नीलयुक्त यूरिया बिक रही है। काश्तकार जसवीर सिंह, जयपाल सिंह, मुनेश्वर सिंह,
प्रबल प्रताप सिंह और विधुर दुबे आदि का कहना है कि वे लोग ब्लैक में खाद खरीदने को मजबूर हैं। दुकानदार सचिन गुप्ता और पंकज गुप्ता ने बताया कि थोक दुकानदारों को अधिक मुनाफा हो रहा है। उन्हें 5 से 10 रुपये प्रति बोरी लाभ मिल रहा है।
डीएपी है, यूरिया और एनपीके नहीं
अमृतपुर। पीसीएफ किसान सेवा केंद्र अमृतपुर में सिर्फ डीएपी थी। यूरिया और एनपीके नहीं थी। सचिव हरिओम मिश्रा ने बताया कि एक हजार बोरी यूरिया की डिमांड की गई है। साधन सहकारी समिति अमृतपुर के सचिव बालमुकुंद पाठक किसानों को किसान बही और इंतखाब से खाद दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि 470 बोरी यूरिया, 990 बोरी डीएपी और 230 बोरी एनपीके खाद की मौजूद है। रामऔतार, देवदत्त, रामसिंह, रामचंद्र, बांकेलाल, मुंशी, नरेशचंद्र, छबिराम, आशाराम और मेवाराम आदि काश्तकारों ने बताया कि उन लोगों को खाद मिल रही है।
दस दिन से खाद का संकट
नवाबगंज। साधन सहकारी समिति गनीपुर 10 दिनों से यूरिया खाद नहीं है। सचिव शिवराज सिंह यादव ने बताया कि डिमांड भेज दी गई है। डीएपी और एनपीके बांटी जा रही है। वहीं पीसीएफ क्रय केंद्र नवाबगंज में पुलिस की मौजूदगी में 342 बोरी यूरिया बांटी गई। खाद खत्म होने से किसानों को निराश लौटना पड़ा। देवानंद, सुनीलदत्त, सुनील कुमार, आमिर, सुरेंद्र सिंह, लाखन सिंह, गब्बर सिंह,
साधु सिंह, अमर सिंह, बुलाकीराम, तोताराम और रामदुलारे आदि काश्तकारों का कहना है कि अब 450 रुपये में यूरिया की बोरी ब्लैक में खरीदनी पड़ेगी। प्रभारी इंचार्ज मदन सिंह यादव ने बताया कि 342 बोरी यूरिया खाद आई थी, जिसे बांट दिया गया है। अब स्टाक निल हो गया है।
150 बोरी यूरिया खाद बची
कंपिल। साधन सहकारी समिति कंपिल में यूरिया खाद 334 रुपये प्रति बोरी दी जा रही है। सचिव शिवपाल सिंह यादव ने बताया कि करीब 800 बोरी यूरिया बांटी गई है। करीब 150 बोरी और बची है। डीएपी 96 बोरी स्टाक में हैं। डीएपी खाद प्रति बोरी 1142 रुपये दी जा रही है। यूरिया खाद की डिमांड भेज दी गई है। काश्तकार रामसिंह, चिरौंजीलाल, शमसाद, रामकिशन, श्याम सिंह, मानसिंह और बबलू ने बताया कि यूरिया खाद खत्म हो गई है।
मोहद्दीनगर, गांधी, राजेपुर व खंडौली में खाद नहीं
राजेपुर। सहकारी समिति अलीगढ़ मोहद्दीनगर, गांधी और खंडौली में 300-300 बोरी यूरिया खाद आई थी। इन सभी केंद्रों पर स्टाक निल हो गया है। जिला सहकारी संघ राजेपुर केंद्र बंद था। मोबाइल पर प्रभारी सुखराम ने बताया कि केंद्र पर खाद नहीं है। डिमांड भेजी गई है।
प्राइवेट दुकानों पर भी खाद नहीं है। सहकारी समिति अलीगढ़ मोहद्दीनगर के सचिव यतेंद्र सिंह यादव ने बताया कि डिमांड भेजी गई है। यूरिया खाद आते ही बांटी जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र से अटैच काश्तकारों को जोत बही पर खाद दी जा रही है। नगद बिक्री बंद है। लालू सिंह, राजेश सिंह, मुनेंद्रपाल सिंह आदि काश्तकारों का कहना है कि अल्लागंज से ब्लैक में यूरिया खाद खरीदकर ला रहे हैं।
लौट रहे किसान
शमसाबाद। कृषक सेवा सहकारी समिति शमसाबाद में खाद नहीं। खाद लेने आए शेर सिंह, राकेश कुमार, गुड्डू और पिंकी अग्निहोत्री आदि किसानों ने बताया कि तीन-चार दिनों से खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं लेकिन खाद नहीं मिल रही है। प्रभारी इंचार्ज राकेश मिश्र ने बताया कि 500 बोरी यूरिया खाद मंगवाई थी। सोमवार को यूरिया समाप्त हो गई। डिमांड भेज दी गई है।
तीन साल से नहीं बंट रही, किसानों का हंगामा
शमसाबाद। साधन सहकारी समिति नगला नान में तीन साल से खाद नहीं बांटी जा रही है। खाद लेने आए काश्तकार अनोखेलाल, आनंद कुमार, रामवीर, अटल कुमार, शिवरतन, प्रमोद कुमार, सुनील कुमार, प्रमोद कुमार, पप्पू, पवन कुमार, रामनरेश, संजीव कुमार, महेशचंद्र और हृदेश कुमार समेत अन्य लोगों को समिति बंद मिली। इस पर इन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।
काश्तकारों का आरोप था कि करीब तीन साल से समिति पर खादी ही नहीं बांटी जा रही है। उन्होंने जिलाधिकारी से जांच करवाकर सचिव पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही फरियाद की कि उन लोगों को खाद दिलाई जाए। इस संबंध में सचिव सतेंद्र यादव से पूछा तो वह चुप्पी साध गए। उन्होंने इतना जरूर बताया कि एक-दो दिन में खाद मंगवाकर बांट दी जाएगी।