फर्रुखाबाद। जनपद में सक्रिय सात हजार समूहों की करीब 70 हजार महिलाओं को शी-मार्ट खुलने से लाभ मिलेगा। इसके लिए केंद्रीय बजट में प्रावधान किया गया है। शी-मार्ट खुलने से समूह को अपने बाजार में बेंचने की सहूलियत रहेगी। उत्पादों को नहीं पहचान मिलने के साथ ही आय में बढ़ोतरी होने से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त और समृद्ध होंगी।
सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष जोर दे रही है। इससे उन्हें शिक्षा, कौशल व कारोबार में बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास है। वर्ष 2026-27 के लिए जारी किए गए केंद्रीय बजट में स्वयं सहायता समूहों का विशेष ध्यान रखा गया है। उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की बिक्री के लिए शी-मार्ट (सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर) खोलने की तैयारी है।
जनपद में करीब सात हजार समूह सक्रिय हैं। इनमें करीब 70 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाएं छोटे से लेकर बड़े उत्पाद तैयार कर तरक्की की राह पर आगे बढ़ रही हैं। समूह की महिलाएं रेडीमेड शर्ट, डिटर्जेंट पाउडर, ब्लॉक प्रिंटिंग, अगरबत्ती, रुई की बत्ती, हवन सामग्री, पूजा के थाल व बर्तन, लड्डू गोपाल के वस्त्र, चूड़ी, कंगन, एलईडी बल्ब जैसे कई प्रकार उत्पाद तैयार कर रही हैं। कई बार महिलाओं के उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध न हो पाने से उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी रोड़ा लग जाता है।
केंद्रीय बजट में इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शी-मार्ट नाम से समुदाय स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट स्थापित करने की बात कही गई है। जनपद के सभी सात ब्लॉकों में चार-चार के हिसाब से 28 क्लस्टर बने हैं। यह शी-मार्ट क्लस्टर स्तर पर स्थापित होने से समूह की महिलाओं को अपने उत्पाद की पहचान मिलेगी। इसके साथ ही उन्हें अपना बाजार उपलब्ध होगा। यह शी-मार्ट समूह के उत्पादों से सजा होगा। इस बाजार में उत्पाद की अच्छी कीमत और खपत होने से महिलाओं को उद्यमी बनने में मदद मिलेगी। प्रथम चरण में लखपति दीदी कार्यक्रम के आधार पर शी-मार्ट योजना लागू होगी। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य यह है कि महिलाएं समूह के तहत सिर्फ छोटे कर्ज पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं व्यवसाय चलाकर सालाना अधिक आय कमा सकें।
डीसी एनआरएलएम व डीडीओ श्याम कुमार तिवारी ने बताया शी-मार्ट योजना से समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने में बड़ा सहयोग मिलेगा। उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए अपना बाजार मिलेगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने से उनकी आय में भी इजाफा होगा।